क्या Mission Chandrayaan 2 विक्रम Lander से संपर्क ना होने के बाद भी चलता रहेगा

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lander vikram

इसरो(ISRO) अपने मिशन चंद्रयान(Mission Chandrayaan) 2 को पूरा करने में जुटा हुया है. लैंडर विक्रम(Lander Vikram) से संपर्क करने की सारी कोशिशे कर रहा है. हालांकि अब तक इसमें कोई सफलता नहीं मिली है लेकिन भारत देश अपनी स्पेस एजेंसी(Soft Agency) के साथ खड़ा है. क्या हो गया अगर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग(Soft Landing) नहीं हो पाई. अभी भी चंद्रमा की सारी जानकारी ग्राउंड स्टेशन(Ground Station) में मिलती रहेगी. कैसे मिलती रहेगी? चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर(Orbiter) से. ऑर्बिटर से जानकारी कैसे मिलेगी आइये जानते है?

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लैंडर विक्रम / फ़ोटो : firstpost

विक्रम लैंडर से भले ही निराशा मिली हो लेकिन यह मिशन नाकाम नहीं रहा है, क्योंकि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर चाँद की कक्षा में अपना काम कर रहा है. इस ऑर्बिटर में कई साइंटिफिक(Scientific) उपकरण हैं और अच्छे से काम कर रहे हैं. चंद्रयान-2 का मुख्य लक्ष्य चांद पर पानी की खोज करना है और वो काम ऑर्बिटर कर ही रहा है. ऑर्बिटर में लगे आठ उपकरण चंद्रमा की सतह और एक्सोस्फीयर(Exosphere) की मैपिंग करेंगे.

lunar orbiter
ऑर्बिटर / फ़ोटो : isro

आपको बता दूँ कि इसरो ने ऑर्बिटर को चंद्रमा के एक साल तक चक्कर लगाने के लिए तैयार किया था लेकिन अब ऑर्बिटर सात साल से ज़्यादा चांद के चक्कर लगाने में सक्षम है. इसरो के चीफ के सिवन (ISRO Chief K Sivan) ने दावा किया कि ऑर्बिटर 7 साल से अधिक समय तक चन्द्रमा के चारों ओर घूम सकता है. इतना ही नहीं ऑर्बिटर इतने सालों तक वहाँ पर मौजूद सभी संभव तत्वो, मिनरल्स और मौसम से लेकर वहाँ के वातावरण के बारे में इसरो को भविष्य में डेटा(data) भेजता रहेगा.

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दुनिया की स्पेस एजेंसियों के लोगो / फ़ोटो : theflatearthsociety

जब चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर की समय सीमा खुद ब खुद बढ़ गयी तो दुनिया की बाकी की स्पेस एजेंसियां(Space Agencies) हैरत में पड़ गई. उनमें नासा के अलावा चीन, रूस और यूरोपियन स्पेस एजेंसियां शामिल है. लेकिन नासा चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को कुछ सिग्नल(Signal) भेज रहा है, शायद वो उस सिग्नल को विक्रम पकड़ पाये तो भारत का मिशन सक्सेसफुल(successful) हो जाएँ.

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फ़ाइल फ़ोटो

आपकी जानकारी के लिए बता देता हूँ कि भारत भी अपने ग्राउंड स्टेशन से विक्रम से संपर्क करने की सारी कोशिशें कर रहा है. अभी x-band यानि माइक्रोवेव वाली तरेंगे स्पेस में  भेज रहा है. क्योंकि इसरो के पास केवल 1 लुनार डे यानि धरती के 14 दिन ही है और अब तक 4 दिन गुजर चुके है. अगर इसरो 21 सितंबर तक विक्रम से संपर्क स्थापित करने में नाकाम रहती है तो, तो भी इसरो का मिशन पूरी तरीके से नाकाम नहीं रहेगा. क्योंकि इस मिशन का ऑर्बिटर सफलतापूर्वक काम कर रहा है.

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