ज़ोमैटो विवाद में डिलीवरी बॉय फ़याज़ ने जो कहा उसे सुनना चाहिए

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UberEats, the online food ordering unit of the Ryder-Healing company Uber, has recently stepped forward to support its rival Zomato.

ऑनलाइन खाना डिलीवर करने वाली कंपनी ज़ोमैटो आज कल काफी चर्चा में है. दरअसल हुआ ये है कि कुछ दिन पहले अमित शुक्ल नाम के एक शख्स ने ज़ोमैटो से खाना आर्डर किया था लेकिन डिलीवरी बॉय के हिन्दू न होने के कारण अमित ने ज़ोमैटो से अपना आर्डर कैंसिल करने के लिए कहा जिसके जवाब में ज़ोमैटो के एक ट्वीट ने सभी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया और इसके साथ ही लोगों की चर्चा का विषय भी बन गया. जवाब में ज़ोमैटो का कहना है कि “खाने का कोई धर्म नहीं होता है और खाना खुद में ही एक धर्म है”. बात तो ज़ोमैटो की बिलकुल सही है.

zomato founder

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डिलेवरी वाले ने क्या कहा ?

खाने और धर्म को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही इस बहस के बीच अब अमित शुक्ल तक खाना ले जाने वाले डिलीवरी बॉय का बयान भी सामने आया है. आपको बता दें कि डिलीवरी बॉय का नाम फ़याज़ है और उनका कहना है कि उन्हें इस घटना से काफी दुःख पहुंचा है लेकिन गरीब होने की वजह से वे इस मामले में कुछ नही कर सकते हैं.

फ़याज़ ने बताया है कि उन्होंने ग्राहक से उनका पता पूछने के लिए फ़ोन किया था लेकिन अमित शुक्ल ने फ़ोन उठाते ही आर्डर कैंसिल करने की बात कही और कहा कि वे एक मुसलामन के हाथो से खाना नहीं लेना चाहते हैं. इस बात से फ़याज़ को काफी दुःख हुआ लेकिन गरीबी के चलते वे खुद को असमर्थ बता रहे हैं. फ़याज़ के जवाब से ये साफ़ है कि उन्हें इस घटना से धक्का लगा है और वे बेहद निराश भी हैं .

सोशल मीडिया पर कई लोग ज़ोमैटो का पक्ष ले रहे हैं तो वही कुछ लोग अमित शुक्ल का भी साथ दे रहे हैं, ऐसे में द पंचायत का ये मानना है कि कर्म ही धर्म है और फ़याज़ मात्र अपना धर्म निभा रहा था, हिन्दू-मुसलमान के नाम पर लोगों को बांटना भारत की एकता को शोभा नहीं देता है . उम्मीद है लोग आने वाले समय में इसका ध्यान रखेंगे और देश की एकता और अखंडता को कयाम रखने में सहयोग देंगे .

the panchayat

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