जानिए मोदी सरकार के संसद में अगले कदम कौन-कौन से होंगे

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uniform civil code

मोदी सरकार 2.0 ने जो वायदे जनता के साथ किये थे उन्हें पूरा करने में लगी हुयी है. संसद के पिछले सत्र में मोदी सरकार ने मोटर वाहन बिल, तीन तलाक़ बिल, यूएपीए बिल, एनआईए बिल, आरटीआई संशोधन बिल, अनुच्छेद 370 का कश्मीर से ख़त्म करने के साथ ही पुनर्गठन बिल समेत 35 बिल दोनों सदनों से पास करवा कर कानून का रूप दिलवा दिया है.

मोदी सरकार / फोटो : deccanchronicle.com

अगर देखा जाये तो मोदी सरकार का ये वाला वर्जन जनता के लिए नई उम्मीद ले कर आया है. कुछेक की उम्मीद पर खरी भी उतरी है. मोदी सरकार संसद के अगले सत्र में और भी नये बिल पेश करने जा रही है. पिछले सत्र में जितने बिल एक साथ पास किये गये थे उतने बिल संसद के किसी भी कार्यकाल में पास नहीं हुये थे. जो नये बिल पेश किये जाएंगे उसमे धर्मांतरण विरोधी कानून बिल और समान नागरिक संहिता बिल शामिल है.

धर्मांतरण विरोधी कानून बिल क्या है?

anti conversion bill
धर्मांतरण विरोधी बिल (फाइल फोटो)

धर्मांतरण विरोधी बिल के अंदर जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करवाने वाले के ऊपर मुकदमा दर्ज़ होगा और उचित कार्यवाई की जाएगी. देश में धर्म परिवर्तन के मामले ज़्यादा देखने को मिल रहे है इसलिए इस बिल को लाने का मक़सद धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है.

समान नागरिक संहिता बिल क्या है?

इसके साथ ही भाजपा सरकार समान नागरिक संहिता यानि यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का बिल लाने की सोच रही है. इसकी मांग 17वी लोक सभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे उठा चुके हैं. निशिकांत दुबे ने लोक सभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि संविधान के दिशानिर्देशक सिद्धांतों के तहत देश में समान नागरिक संहिता होनी चाहिए. उनका इस बिल के बारे में कहना है कि “समय आ गया है कि समान नागरिक संहिता के लिए विधेयक सदन में लाया जाए. जिससे सब नागरिक भारतीय कहलाएं, न कि हिंदू, मुस्लिम या ईसाई.”

राम माधव / फोटो : indiatoday.in

हाल ही में एक इंटरव्यू में बीजेपी के महासचिव राम माधव ने कहा था कि “तीन तलाक बिल लाने के साथ हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मोदी सरकार समान नागरिक संहिता लाने के लिए प्रतिबद्ध है.” उनका कहना था कि सरकार समान नागरिक संहिता के वायदे तीन-चार साल में पूरे करने की कोशिश करेगी.

अभी देश में कौनसे लॉ है?

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड / फोटो : legalparley.in

अभी देश में मुसलमानों, ईसाइयों और पारसी समुदाय का अपना पर्सनल लॉ है जबकि हिंदू सिविल लॉ के तहत हिंदू, सिख, जैन और बौद्ध आते हैं. मुस्लिम पर्सनल लॉ में महिलाओं को पैतृक और पति की संपत्ति में वैसा अधिकार नहीं है जैसा हिंदू सिविल लॉ के तहत महिलाओं को मिला है. समान नागरिक संहिता के लागू हो जाने पर शादी, तलाक़ और ज़मीन-जायदाद के बंटवारे को लेकर एक समान क़ानून लागू होगा. समान नागरिक संहिता का मतलब है कि सभी नागरिक के लिए एक निष्पक्ष कानून, जिसका किसी भी धर्म से कोई ताल्लुक नहीं होगा. यानि कि हर एक नागरिक के लिये एक ही जैसा कानून होगा.

संसद के अगले सत्र में भारत सरकार, देश की बुराइयों पर रोक लगा कर उन्हें अच्छाइयों में तब्दील करने पर ज़ोर लगाएगा. अब सरकार कितनी तब्दीली कर पाएगी उसका पता तो संसद के अगले सत्र में ही लग पायेगा.

the panchayat

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