जानिए पूरे विस्तार से UAPA बिल के बारे में

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UAPA

तारीख थी 2 अगस्त 2019 इस दिन राज्य सभा में एक ओर बिल पास हो गया. अगर पिछले कुछ दिनों में देखा जाए तो अब तक सरकार ने बहुत से बिल पास करवा दिये है. पहला मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से मुक्ति दिलाते हुये ट्रिपल तलाक बिल पास करवाया, दूसरा वाहनों की स्पीड और सुरक्षा पर ज़ोर देना वाला मोटर वाहन अमेंडमेंट बिल पास हुआ और अब तीसरा आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के लिए अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट यानि शॉर्ट में UAPA बिल पास हुआ. हिन्दी में इसे गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) कानून कहा जाता है. इसके साथ नेशनल मेडिकल कमीशन बिल यानि NMC बिल और बहुत से बड़े-बड़े बिल पास हुये. UAPA बिल को लोक सभा से पास हो जाने के बाद 2 अगस्त 2019 को राज्य सभा में पेश किया गया. जिसके पक्ष में 147 सांसद ने वोट दिये और बिल के खिलाफ़ 42 वोट डाले गए. बहुमत के साथ UAPA बिल राज्य सभा से भी पास हो गया. अब UAPA बिल को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा.

फ़ोटो : जागरण जोश

हालांकि अभी बहुत से बिल पास हुये है लेकिन आज हम UAPA बिल के बारे में विस्तार से जानेंगे कि इस बिल से क्या फायदा है और क्या नुकसान है, वो भी सरल भाषा में जिससे समझने में आसानी हो. विस्तार से समझे उससे पहले मैं इसको मोटे तौर पर बता देता हूँ कि इस बिल में आखिर क्या है. इस बिल के अनुसार आतंक से संबंध रखने वाले किसी शख़्स को आतंकी घोषित किया जा सकता है. जिस शख़्स को आतंकी घोषित किया गया है उसकी संपति जब्त कर दी जायेगी और वो कहीं पर भी यात्रा नहीं कर सकता है. उम्मीद करता हूँ अब आपको आइडिया लग गया होगा कि UAPA बिल से क्या होगा. अब इसे पूरे विस्तार से समझते है और समझना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि यह बिल अपनी सुरक्षा से जुड़ा हुया है.

NIA क्या है?

NIA Logo

NIA यानि नेशनल इंवेस्टिगेट एजेंसी भारत में आतंकवाद के खिलाफ कार्यवाई करती है. साल 2008 में मुंबई में जब आतंकी हमला हुआ था तब उस हमले के बाद इस एजेंसी को बनाया गया था. यह एजेंसी भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन आती है और इसके अंदर 649 कर्मचारी काम करते है. NIA एक सेंट्रल काउंटर टेररिज़्म लॉ एंफोर्समेंट एजेंसी के रूप में काम करती है. NIA बिना किसी स्पेशल परमिशन से किसी भी राज्य में आतंकियों के खिलाफ कार्यवाई कर सकती है. NIA एक्ट 2008 में कुछ बदलाव करके UAPA बिल गृहमंत्री अमित शाह ने तारीख 15 जुलाई 2019 को लोक सभा में और तारीख 2 अगस्त 2019 को राज्य सभा में पेश किया और दोनों सदन में बिल पास हो गया.

UAPA और NIA एक्ट 2008 में अंतर

NIA एक्ट 2008 के अनुसार आतंकवादी संगठन पर कार्यवाई की जाती थी लेकिन इस नए UAPA बिल के अनुसार संगठन की बजाय आतंकवादी पर सीधे ही कार्यवाई कर दी जाएगी. UAPA बिल, NIA एक्ट 2008 में कुछ परिवर्तन कर के बनाया हुया है जिसके कुछ बदलाव आपको बताते है.

  1. कार्यप्रणाली में विस्तार – पहले के एक्ट में NIA केवल एटोमिक एनर्जी एक्ट,1962 और अनलॉफूल एक्टिविटीज़ प्रिवेनशन एक्ट,1967 से संबन्धित केस को ही इंवेस्टिगेट करती थी लेकिन नए बिल के अनुसार NIA के इंवेस्टिगेशन का दायरा बड़ा दिया गया है. जैसे – मानव तस्करी, नकली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों का निर्माण और बिक्री, साइबर आतंकवाद और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम,1908 के तहत अपराध.
  2. अधिकार क्षेत्र में विस्तार – पहले के एक्ट के मुताबिक NIA अधिकारियों की पावर अन्य पुलिस अधिकारियों के समान थी और पावर देश भर में लागू थी. लेकिन नए बिल के अनुसार NIA के अधिकार क्षेत्रों में बढ़ोतरी की है. NIA अब भारत देश के साथ साथ विदेशों में भी जाँच कर सकती है. विदेशों में जाँच भारत के अंतरराष्ट्रीय संधियों और देशों के घरेलू नियमों के अधीन होगी.
  3. सेशन कोर्ट को स्पेशल कोर्ट बनाना – तीसरा बदलाव NIA के दायरे में आने वाले अपराधों या “अनुसूचित अपराधों” के लिए स्पेशल अदालतों से संबंधित है. NIA अधिनियम 2008 के अनुसार, अधिनियम केंद्र को NIA के जाँचो के लिए विशेष अदालतों का गठन करने की अनुमति देता है. लेकिन UAPA बिल के अनुसार केंद्र सरकार और राज्य सरकारें अधिनियम के तहत कार्यवाई करने के लिए सत्र न्यायालयों को विशेष न्यायालयों के रूप में चुन सकती हैं। हालांकि यह संबंधित राज्य के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों बातचीत कर के किया जाएगा.

जैसा कि इन बदलावों से पता लग गया होगा कि NIA में सजा देने की दर बढ़ा दी गयी है.इस बिल में प्रावधान किया गया है कि जो शख़्स आतंकी घोषित किये जायेंगे वो केंद्रीय गृह सचिव के सामने अपील कर सकेंगे और गृह सचिव को 45 दिन में उस अपील का संज्ञान यानि फैसला लेना ही होगा.

बिल के ऊपर सदन में क्या हुया?

अब जानते है इस बिल को लेकर सदन में क्या हुआ था. विपक्षी पार्टी के नेता दिग्विजय सिंह ने इस बिल पर सवाल खड़ा करते हुये कहा कि इस बिल से किसी भी शख्स को आतंकवादी बता कर कार्यवाही कर दी जाएगी जो कि एक दम गलत है. इस सवाल का जवाब गृहमंत्री अमित शाह देते है जो शख़्स आतंकवाद से जुड़ा हुआ नहीं होगा तो उसे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है. इस बिल का मकसद सुरक्षा एजेंसी को आतंकवादी से ‘चार कदम’ आगे रखना है.

द पंचायत का मानना है कि इस नए बिल के आने से भारत आतंकवाद को जड़ से ख़त्म करने में सफल होगा.

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