1996 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल: भीड़ ने दंगा किया, क्रिकेटर रोने लगा और भारत हार गया

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1996 world cup eden gardens

तारीख थी 13 मार्च 2018, जगह थी कोलकाता का ईडन गार्डन स्टेडियम, भारत और श्रीलंका के बीच क्रिकेट विश्वकप का सेमी फाइनल मैच खेला जा रहा था. भारत को 50 ओवरो में 252 रन बनाने का लक्ष्य मिला था. मैच की स्थिति कुछ ऐसी थी कि भारतीय टीम के 8 बल्लेबाज़ 120 रन बना कर ही पवेलियन लौट गये. अब क्रीज़ पर एक तरफ विनोद काम्बली और दूसरी तरफ अनिल कुंबले खेल रहे थे. भारतीय टीम की ये हालत देख कर दर्शकों को ये समझ आने लगा कि अब भारतीय टीम का जीतना नामुमकिन है. ऐसे में स्टेडियम में आये लोगों ने हंगामा करना शुरू कर दिया. खेल के बीच में ही दोनों टीमों के खिलाड़ियों को मैदान से बाहर ले जाया गया. मैदान से बाहर जाते समय काम्बली की आँखों में आंसू आ गये थे.

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जब मैदान से बाहर जाते हुए रोने लगे विराट कोहली

क्रिकेट के इतिहास में ये अब तक की सबसे ख़राब तस्वीर थी. भारत का प्रदर्शन विश्वकप के सभी मैच में शानदार रहा था और चार दिन पहले ही भारत ने क्वाटर फाइनल में पाकिस्तान को हराया था. सब कुछ इतना अच्छा चलने के बाद भी आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने इस मैच को इतिहास का सबसे ख़राब मैच बना दिया? जानते हैं उस मैच के पीछे की पूरी कहानी.

किस तरह हुई मैच की शुरुआत?

भारतीय टीम के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने श्रीलंका के खिलाफ टॉस जीत कर पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया. मैच की शुरुआत काफी शानदार रही क्योंकि जवागल श्रीनाथ ने पहले ही ओवर में सनथ जयसूर्या और रमेश कालूवितर्णा को आउट कर पवेलियन भेज दिया था. श्रीनाथ का कहर बस इतने में ही रुकने वाला नही था, उन्होंने बाद में असंका गुरुसिन्हे को भी आउट कर दिया. इसी तरह खेलते हुए श्रीलंका ने 50 ओवरों में आठ विकेट गिरने के साथ 251 रन बनाये और भारत को 252 रन का लक्ष्य दिया. श्रीलंका की टीम से अरविन्द डिसिल्वा ने 66 और रोशन महानामा ने 58 रन बनाये.

क्या हुआ जब भारतीय टीम ने की बल्लेबाजी?

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जब गुस्साई भीड़ ने आग लगाई कोलकता के ईडन गार्डन में

मैच की दूसरी पारी शुरू हो गयी थी. सचिन तेंदुलकर और नवजोत सिंह सिद्धू बल्लेबाजी करने मैदान में आये थे. सचिन तेंदुलकर ने 88 गेंदों में 65 रन बनाये. भारत का पहला विकेट आठ गेंदों पर गिरा. नवजोत सिंह सिद्धू आउट हो गये थे. स्थिति तब तक फिर भी ठीक थी जब तक सचिन तेंदुलकर मैदान में पैर जमाये हुए थे लेकिन उनके आउट होते ही सभी खिलाडी एक-एक कर के आउट होते गये. 34.1 ओवरों में भारत के आठ विकेट गिर गये. स्टेडियम में आये दर्शकों को अब ये समझ आ गया था कि भारत का जीतना अब नामुमकिन है. हार के गुस्से में दर्शकों ने स्टैंड में आग लगा दी और मैदान में बोतले फेंकने लगे साथ ही स्टैंड की सीटों को भी उखाड़ना शुरू कर दिया. मैच रेफरी क्लाइव लॉयड ने सभी खिलाडियों को 15 मिनट के लिए बहार जाने के लिए कहा. उनका सोचना शायद ये था कि 15 मिनट में दर्शकों का गुस्सा शांत हो जायेगा और मैच को दुबारा शुरू कर दिया जायेगा. खिलाड़ियों को मैदान में वापस लाया गया लेकिन दर्शक अब भी उतने ही आक्रोशित थे. मैच की ऐसी हालत देख कर रेफरी ने खेल को बंद करने का आदेश दिया और श्रीलंका को विजेता घोषित कर दिया.

रो पड़े विनोद काम्बली

श्रीलंका के खिलाडी अपनी जीत का जश्न मना रहे थे लेकिन विनोद काम्बली को अब भी यकीन नही हुआ कि उनकी टीम अब इस टूर्नामेंट से बहार हो गयी हैं. टीम इंडिया का विश्वकप जीतने का सपना ख़त्म हो चुका था. काम्बली की आँखों में आंसू थे और वे रोते रोते वापस पवेलियन चले गये. इस मैच में हार के बाद भारतीय टीम विश्वकप से एक कदम दूर रह गयी और इस बात का दुःख पूरी टीम को था.

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