Bollywood की कुछ ऐसी Movies जो सख़्त आदमी को भी रोने पर मजबूर कर दे

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movie theatre

सबके दिलों में सिनेमा जगत(Film Industry) की एक अलग ही पहचान है. जिंदगी के सारे इमोशंस(Emotions) पर्दे पर उतार दिये जाते है. कुछ लोग उन इमोशंस के साथ-साथ बह जाते है तो कुछ लोग अपने इमोशंस को बाहर नहीं आने देते है. जिंदगी का एक इमोशन सबसे अनमोल इमोशन है और वो है दिल को बात का छू जाना. सिनेमा(Cinema) में भी एक ऐसा जॉनर होता है जिसमें फ़िल्म सीधे लोगो के दिलों को छूती हुई निकलती है. आज मैं उसी जॉन(Zone) की कुछ फिल्मों का जिक्र करने जा रहा हूँ जिसने भारत के सख़्त मर्दों के दिलों पर भी राज किया है. चलिये जानते है वो मूवीज़(Movies) कौन-कौन सी है?

nargis dutt
नरगिस दत्त / फ़ोटो : indiatoday

सबसे पहले चलते है साठ के दशक(Decade) में. बॉलीवुड(Bollywood) पर राज करने वाली अभिनेत्री(Actress) नरगिस की फ़िल्म से शुरुआत करते है.

Mother India Poster
मदर इंडिया / फोटो : wikipedia

मदर इंडिया(Mother India) – 14 फरवरी 1957 को आई महबूब ख़ान निर्देशित फ़िल्म मदर इंडिया. जैसा नाम रखा गया था वैसा ही काम नरगिस ने बाखूबी निभाया था. फ़िल्म की कहानी में कई सारे ऐसे मोड थे जहां लोगो की आँख में से आँसू बस निकले ही जा रहे थे. मदर इंडिया की कहानी पति के घर छोड़ जाने के बाद से शुरू होती है. एक अबला नारी कैसे अपने तीन दुधमुंहे बच्चों को अकेले पालती है. छोटा बच्चा बुखार से तप रहा है. मंझला बच्चा भूख के मारे मिट्टी खाने को मजबूर है. बच्चों को यूं भूख से मरते देख माँ अपनी अस्मिता का सौदा सेठ लाला से करने चली जाती है. ये सारे सीन इतने सलीके से शूट किए गए थे कि दर्शक गण भाव-विभोर हो गए थे.

anand movie poster
आनंद / फ़ोटो : wikipedia

आनंद(Anand) – 80 के दशक की शुरुआत में ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म आनंद आई थी. ये फ़िल्म लोगो को एक सीख सीखा कर गयी थी और वो सीख थी जिंदगी में बड़ी से बड़ी कठिनाइयाँ आए तो उन कठिनाइयों का हंस कर सामना करे. कठिनाइयाँ छोटी लगने लगेगी. फ़िल्म की कहानी आनंद नाम के शख़्स की है. जिसे कैंसर जैसी बड़ी बीमारी है. लेकिन वो उस बीमारी में भी हँसता खेलता रहता है. आनंद का इलाज कर रहे डॉ. बाबू मोशाय भास्कर भी हैरानी से बस उससे सीखते जाते है. फ़िल्म के क्लाइमेक्स वाला सीन सबको रुंहासा करके ही छोडता है. उस सीन में आनंद की मृत्यु हो जाती है. जिसका पता सबको होता है लेकिन सीन को देख कर मन भर ही आता है. इस फ़िल्म में आनंद का रोल राजेश खन्ना और डॉ. बाबू मोशाय भास्कर का रोल अमिताभ बच्चन निभाते है. इसका एक dialogue जिंदगी बड़ी होनी चाहिए, लंबी नहीं बाबू मोशाय लोगो के दिमाग में आज भी छपा हुया है.

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सदमा / फ़ोटो : imdb

सदमा(Sadma) – 90 के दशक की शुरुआत हो चुकी थी और उसके 2 साल गुजरने के बाद 1983 में एक मूवी सदमा आई. फ़िल्म की कहानी ने दर्शको के साथ-साथ अभिनेत्री को भी रुला दिया था. इस फ़िल्म को लिखा और निर्देशन बालू महेंद्र ने किया था. बालू महेंद्र ने पहले ये मूवी तमिल में लिखी थी जिसका नाम ‘मुंद्रम पिरई’ था. सदमा की कहानी में बड़े ही रोचक और संवेदनशील मोड है. नेहलता का बचपन में कार एक्सीडेंट हुया था जिसकी वजह से उसे भूलने की बीमारी लग गयी थी. इस बीमारी का फायदा वेश्याघर वाली उठाती है और नेहलता को अपने वेश्याघर में ले आती है. सोमू और नेहलता की प्रेम कहानी भी लोगो को पसंद की गई थी. क्लाइमेक्स में नेहलता को मरना और सोमू का उसके लिए छटपटाना, लोगो के दिमाग में गहरा असर करने के लिए काफी था. नेहलता का किरदार श्रीदेवी ने और सोमू का किरदार कमल हसन ने निभाया था.

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तारे जमीं पर / फ़ोटो : imdb

तारे जमीं पर(Taare Zameen Par) – 21 दिसंबर 2007 को आई आमिर ख़ान निर्देशित तारे जमीं पर ने बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ दर्शको के मन में अलग जगह बना ली थी. फ़िल्म की कहानी केवल एक ऐसे बच्चे ईशान के इर्द-गिर्द घुमती है जो पढ़ने में इतना अच्छा नहीं है. जिसकी वजह से ईशान हमेशा अपने घर और स्कूल में डांट खाता रहता है. फिर उसके स्कूल में एक नए टीचर राम शंकर निकुंभ की एंट्री होती है, जो ईशान के अंदर छिपे पेंटर की प्रतिभा को बाहर लाते है. जब क्लाइमेक्स में ईशान एक प्रदर्शनी प्रतियोगिता में भाग लेने पहुंचते हैं तो फिल्म देख रहे दर्शकों के आंखें भर आती हैं. क्योंकि इससे पहले का पूरा दृश्य बेहद दिल को छू लेने वाला था. ईशान जैसा संजीदा रोल दर्शील सफारी ने और अतरंगी टीचर राम शंकर का रोल आमिर ख़ान ने निभाया था.

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उड़ान / फ़ोटो : youtube

उड़ान(Udaan) – विक्रमादित्य मोटवानी निर्देशित उड़ान मूवी साल 2010 में रिलीज हुई थी. उड़ान की कहानी एक सख़्त और गैर-जिम्मेदार पिता और उसके दो बेटों की है. कहानी की शुरुआत रोहन से शुरू होती है. रोहन को बोर्डिंग स्कूल वालों ने निकाल दिया था जिसकी वजह से वो अपने बाप और 6 साल के सौतले भाई अर्जुन के साथ रहने आता है. रोहन को अपने बाप की दूसरी शादी का पता ही नही होता है. फ़िल्म का एक सीन इतना बारीकी से शूट किया गया है कि वो सीन देखते है दर्शको का दिल भर आ जाता है. उस दृश्य में होता ये है कि रोहन अपने छोटे भाई अर्जुन को पीठ दिखाने को बोलता है लेकिन अर्जुन मना कर देता है. तब रोहन जबरदस्ती अर्जुन की पीठ देख कर दंग रह जाता है. उसके पीठ पर लाल-सुर्ख बेल्ट के निशान छपे हुये होते है.

Lagaan Movie Poster
लगान / फ़ोटो : koimoi

सिनेमा जगत के एक अभिनेता(Actor) की बात याद आती है और वो है, मिस्टर परफेक्टनिस्ट आमिर ख़ान. अपने फ़िल्म सलेक्शन के बारे में वो कहते है कि जब कहानी सुन रहे होते है तो इस बात का ध्यान रखते है कि इस कहानी ने कितनी बार उनके दिल को छूआ. जैसे कि जब आशुतोष गोवारिकर उनके पास ‘लगान(Lagaan)’ फ़िल्म की कहानी लेकर आए थे तब वो कहानी सुन कर कई बार रो दिये थे. कुछ ऐसा ही आम लोगो के साथ होता है, कोई फूट-फूट कर अपनी भावना को जाहिर करते है तो कोई अंदर ही दबा देता है. ये थी 5 मूवीज़ जिसने सख़्त आदमियों को भी रोने पर मजबूर कर दिया था.

the panchayat

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