क्या है शिमला समझौता और क्यों पाकिस्तान को आयी इसकी याद

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जबसे भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35a को हटाया है तब से ही पकिस्तान ने चैन की सांस नहीं ली है. इसके चलते पाकिस्तान ने भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस को भी रोक दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी का कहना है कि वो 1972 में हुए शिमला समझौते की कानूनी वैधता को परखना चाहता है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियों गुटेरेस ने भी शिमला समझौते की बात करते हुए भारत पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता निभाने से मना कर दिया है।

शिमला समझौता Photo : Oneindia

अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद पाकिस्तान ने कई कोशिशे की है जिस से वो भारत के फैसले को बदल सके लेकिन मोदी सरकार इस बार पाकिस्तान की बात सुनने को राज़ी नहीं है। ऐसे में पकिस्तान को शिमला समझौते की याद आ गयी। लेकिन आज चर्चा का विषय ये नहीं है कि पाकिस्तान 370 को हटाने की जवाबी कार्रवाई में क्या कर रहा है, चर्चा का विषय ये है कि आखिर ये शिमला समझौता है क्या ? और इसमें कोनसे बाते और नियम शामिल है।

कब हुआ था शिमला समझौता ?

तारिख 2 जुलाई 1972 में भारत पाकिस्तान के बीच शिमला में एक समझौते पर भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किये थे। उसी को शिमला समझौता कहा जाता है। आपको बता दें कि सन 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ था जिसके बाद भारत ने उनके 90 हज़ार सैनिकों को युद्ध बंधी बनाया लिया था। इसके बाद दोनों देशो के बीच सम्बन्ध सुधारने और युद्ध बंधियों को छुड़ाने के लिए ये समझौता किया गया था।

चलिए जानते हैं कि आखिर किन शर्तों पर हुआ था शिमला समझौता और कोनसे नियमों पर हुई थी दोनों देशो में रज़ामंदी।

दोनों देशों ने आपसी सम्बन्ध सुधारने, शांति बनाये रखने और एक दूसरे का सहयोग करने का संकल्प लिया था। समझौते के दौरान दोनों देशों के बीच कुछ बातों पर सहमति जताई गयी थी।

दोनों देशों ने 17 दिसंबर 1971 को युद्ध विराम की तारिख तय की। साथ ही ये भी तय हुआ था कि समझौते के बाद 20 दिनों के अंदर दोनों देशों की सेना अपनी निर्धारित सीमा में वापस चली जाएँगी।

समझौते में ये भी तय हुआ था कि दोनों देशो की सरकार के अध्यक्ष आने वाले समय में सम्बन्ध अच्छे बनाये रखने के लिए आपस में मिलते रहेंगे और बातचीत करते रहेंगे।

दोनों देश सभी विवादों और समस्याओं का शांतिपूर्ण हल निकालेंगे और बात चीत कर के सभी मसलो को सुलझाएंगे। साथ ही दोनों देशों के विवादों के बीच किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को शामिल नहीं करेंगे।

दोनों देशों के लोगों का आना-जाना जारी रखने के लिए यातायात की सुविधा को भी जारी रखने का फैसला लिया।

दोनों देशों के बीच आर्थिक सम्बन्ध को सुधारने की भी पूरी कोशिश की जाएगी।

किसी भी मुद्दे पर दोनों देशों के बीच अंतिम निर्णय न होने पर दोनों देश में से कोई भी एक पक्ष स्थिति को बदलने का एक तरफ़ा निर्णय नहीं ले सकता है।

दोनों देश ऐसे किसी भी कार्य का प्रोत्साहन या बढ़ावा नहीं देंगे जिस से देश की शांति का उल्लंघन हो।

दोनों देश एक दूसरे की प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करेंगे साथ ही एक दूसरे के आंतरिक मुद्दों में दखल नहीं देंगे।

संचार के सभी साधन जैसे डाक, समुद्री रस्ते, टेलीग्राफ सेवा, हवाई रास्ते अदि को फिर से शुरू करेंगे।

शान्ति बनाये रखने व दोनों देशों के युद्धबंदियों व आम लोग जिन्हे बंदी बनाया हुआ हो उनकी अदला बदली साथ ही जम्मू-कश्मीर के अंतिम निर्णय और राजनयिक सम्बन्धो को सामान्य रखने के लिए दोनों देशों के अध्यक्ष मिलते रहेंगे।

विज्ञानं और संस्कृत के क्षेत्र में आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की बात पर सहमति भी हुई।

the panchayat

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