12वीं के छात्र ने बना डाला एक एप जो मदद करेगा छोटे दुकानदारों की

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टेक्नॉलॉजी के युग में इंसान मोबाइल से चिपके से रहते है. एप स्टोर या प्ले स्टोर से कोई ना कोई एप मोबाइल में इंस्टोल होते रहते है. कुछ काम के होते है और कुछ काम नहीं आते है.

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गूगल का प्ले स्टोर और एपल का एप स्टोर / फ़ोटो : psafe

गुरुग्राम (गुड़गांव) के हैरिटेज एक्सपिरेन्शियल लर्निंग स्कूल (Heritage Xperiential Learning School) में पढ़ने वाले 12वीं के छात्र अर्जुन अग्रवाल ने ‘उधार खाता’ एप बनाया है. इस एप के जरिये किराना, दूध, सब्जी, चाय और पान की दुकान चलाने वाले वाले दुकानदार को फायदा पहुंचेगा.

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अर्जुन अग्रवाल अपना एप दिखते हुये (फ़ाइल फ़ोटो)

एप बनाने के पीछे क्या मकसद है और दिमाग में आइडिया कब आया

दैनिक भास्कर के अनुसार, एप बनाने के आइडिया के बारे में अर्जुन कहते है कि वो घर के पास वाली दुकान पर कुछ सामान लेने गये थे. उनके पास पैसे नहीं थे तो दुकानदार से सामान उधार देने की बात कही, लेकिन दुकानदार ने कहा कि कई लोग उससे उधार सामान लेकर जाते हैं और बाद में पैसे भी नहीं चुकाते है. इसलिए अर्जुन को भी दुकानदार ने उधारी में सामान नहीं दिया. सामान का पैसा वापस नहीं मिलने से दुकानदार का नुकसान हो जाता है। बस, यही से उधारी से जुड़े एप को बनाने का आइडिया दिमाग में आया.

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उधार खाता एप का गूगल प्ले स्टोर से स्क्रीनशॉट

जब अर्जुन ने एप बनाना शुरू किया तब दूसरे एप्स के साथ तुलना भी की थी. दूसरे एप्स जैसे ‘ओके क्रेडिट’, ‘खाता बुक’ या अन्य और एप्स केवल बड़े दुकानदारों के लिए डिजाइन किये गए है. यानि कि वो दुकानदार जो टेक्नोलॉजी को समझते हैं. अर्जुन ने ‘उधार खाता’ एप को छोटे दुकानदार जैसे चायवाला, पानवाला को सोचकर बनाया है. इसके फीचर्स बेहद आसान है और इसे इस्तेमाल करने में किसी तरह की मुश्किल नहीं आती. खास बात ये है कि एप इंटरनेट के बिना भी काम कर करेगा.

इस एप को बनाने के ख़र्चे के ऊपर अर्जुन ने कहा कि केवल बस से जिस जगह दुकानदारों से बात करने जाते थे बस वो ही लगा है. अर्जुन आगे कहते है कि उन्होंने अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि छोटे दुकानदारों के उधारी मैनेजमेंट के लिए इस एप को बनाया है. ये एप उनकी तरफ से दुकानदारों के लिए एक चैरेटी है.

इसके साथ ये भी बताया कि वो कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहे है. इसलिए उनका इन्टरेस्ट टेक्नॉलॉजी में ही है. अर्जुन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एक महीने का एप डेवलपमेंट कोर्स किया है, जिसके बाद उन्होने ‘उधार खाता’ एप बनाया जो उनका पहला एप है.

‘उधार खाता’ में ख़ास कर हिन्दी भाषा का उपयोग किया हुया है, क्योंकि ये एप छोटे दुकानदारों को ध्यान में रख कर डिजाइन किया गया है. इस एप में अभी कोई पेमेंट गेटवे नहीं है, ये एप अभी SMS नोटिफिकेशन पर काम कर रहा है. आने वाले दिनों में इस एप पर पेमेंट गेटवे की सुविधा भी डाली जाएगी जिससे उधारी एप के जरिये ही चुकायी जा सकेगी. अर्जुन ने डेटा को लेकर कहा कि दुकानदारो का डेटा बिलकुल सुरक्षित रहेगा उसका कोई भी यूज नहीं ले सकेगा. उन्होंने ऐसी कोडिंग की है कि उन्हें भी डेटा नहीं दिखेगा.

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