आर्टिकल 370 हटने का सपना पहले किसने देखा था?

574
shyama prasad mukharji

तारीख थी 6 जुलाई 1901 इस दिन भारत देश में एक ऐसे इंसान पैदा हुये जिसने एक सपना देखा था. लेकिन वो सपना उनके देहांत होने के 66 साल बाद पूरा हुआ. जी, मैं यहाँ जनसंघ के संस्थापक डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बात कर रहा हूँ. जनसंघ संस्था वो है जो आज भाजपा के नाम से जानी जाती है.

फोटो : कैचन्यूज़

श्यामा प्रसाद का जन्म एक बंगाली परिवार में हुया था. उनके पिताजी आशुतोष मुखर्जी बंगाल के जाने-माने वकील थे. मुखर्जी ने बीएल और एमए कर रखी थी. 1927 में वो बेरिस्टर भी बन गए थे. पिता की मृत्यु होने के बाद मुखर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में एडवोकेट के रूप में नाम दर्ज करवा लिया था. डॉ. मुखर्जी महज़ 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता यूनिवर्सिटी के कुलपति बन गए थे. ये कम उम्र में कुलपति बनने का अब तक का रिकॉर्ड है जो आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है. 1938 तक मुखर्जी विश्वविध्यालय के कुलपति रहे. कलकत्ता यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बंगाल विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे. साल 1937 से लेकर साल 1941 तक ‘कृषक प्रजा पार्टी’ और मुस्लिम लीग का गठबन्धन सत्ता में आया. इस समय मुखर्जी विरोधी पक्ष के नेता बन गए. वे फज़लुल हक़ के नेतृत्व में प्रगतिशील गठबन्धन मंत्रालय में वित्तमंत्री के रूप में शामिल हुए, लेकिन उन्होंने एक वर्ष से कम समय में ही इस पद से अपना इस्तीफ़ा दे दिया. बाद में मुखर्जी ‘हिन्दू महासभा’ में शामिल हुए और 1944 में वे इस ‘हिन्दू महासभा’ का अध्यक्ष बनाया गया.

अनुच्छेद 370 के हट जाने पर जम्मू-कश्मीर में क्या बदलाव देखने को मिलेगा

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने श्यामा मुखर्जी को सरकार में उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री बनाया था. डॉ. मुखर्जी ने लियाकत अली ख़ान के साथ दिल्ली समझौते के मुद्दे पर 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया.  इसके बाद उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को दिल्ली में ‘भारतीय जनसंघ’ की बनाई और इसके पहले अध्यक्ष बने.

कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद फिल्म और राजनीति से जुड़े लोगो की प्रतिक्रिया

भारत की आजादी के बाद कश्मीर को विशेष अधिकार दिए गए थे. उस अधिकार के तहत जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा और अलग संविधान था. वहां मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था. डॉ. मुखर्जी ने इसका विरोध करते हुए नारा दिया – एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान, एक देश में दो विधान नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे. इसी बात का विरोध करते हुए वह जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करने पर उन्हें 11 मई 1953 में शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने पुलिस हिरासत में ले लिया. पुलिस हिरासत लेने की वजह यह थी कि तब कश्मीर में प्रवेश करने के लिए एक प्रकार से पासपोर्ट के समान परमिट लेना पडता था और श्यामा प्रसाद मुखर्जी बिना परमिट लिए कश्मीर गए थे. वहां गिरफ्तार होने के कुछ दिन बाद ही 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई. उनकी मृत्यु का खुलासा आज तक नहीं हो सका है.

फोटो : आज तक

जो सपना डॉ॰ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देखा था उसको साकार उन्हीं की बनाई सरकार भाजपा ने आज आर्टिकल 370 और आर्टिकल 35ए को हटाकर कर दिया.

the panchayat

2 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here