पुरानी जीन्स से बच्चो के लिए स्कूल किट बनाते हैं ये तीन दोस्त

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कपडे जब पुराने हो जाते हैं तो हम उन्हें फ़ालतू समझ कर फ़ेंक देते हैं और कुछ समय बाद वो कपड़ों का एक ढेर बन कर रह जाते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि पुराने कपड़ों के उस ढेर से किसी की मदद की जा सकती है? या वो किसी ज़रूरतमंद के काम आ सकते हैं? शायद नहीं, लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने आम लोगों की सोच से आगे जा के कुछ सोचा और लोगों की मदद करने का फैसला लिया। हम बात कर रहे हैं तीन ऐसे लोगों की जो हमारी और आपकी ही तरह हैं। वो तीन छात्र जिन्होंने पुरानी जीन्स को इस्तेमाल में ला के गरीब बच्चों की मदद करने का ज़िम्मा उठाया।

फैशन डिजाइनिंग में डिग्री पूरी कर के प्रोजेक्ट में बिजी रहने वाली मृणालिनी राजपुरोहित उन तीन दोस्तों में से एक हैं। मृणालिनी वो शक्श हैं जिन्होंने लोगों की मदद करने के बारे में सबसे पहले सोचा। उनको ख़याल आया कि उन्हें कुछ ऐसा करना है जिस से लगे कि उन्होंने समाज के लिए कुछ किया है। अपने इसी ख़याल को उन्होंने अपने दो दोस्त अतुल मेहता और निखिल गेहलोत को बताया और बस फिर क्या था तीनों ने इस काम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। तीनों ने मिल के एक ऐसा स्टार्टअप शुरू करने का फैसला किया जो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करेगा। स्टार्टअप का नाम रखा सोलक्राफ्ट। गरीब बच्चों की मदद करने वाले इस स्टार्टअप में इन्होने पुरानी डेनिम जीन्स से बच्चों के लिए स्कूल की सामग्री तैयार करना शुरू कर दिया।

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डिजाइनिंग में माहिर इन तीनों दोस्तों ने इस्तेमाल की हुई जीन्स से स्कूल के बैग, चप्पल और पेंसिल बॉक्स बनाने का काम शुरू किया जिसे वो गांव के गरीब बच्चो को दे सके। इन्होने ने लोगों की मदद से पैसे जुटा कर गाँव के स्कूल में बच्चों तक ये सामान पहुँचाना शुरू किया। लेकिन अब इन्हे बस इतने तक ही सीमित नहीं रहना था। मतलब ये कि अब इन तीनो दोस्तों को अपना काम आगे बढ़ाना था जिस से वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद कर सके। इसके लिए मृणालिनी सहित तीनो दोस्तों ने सोलक्राफ्ट नामक स्टार्टअप को सीएसआर के माध्यम से आगे बढ़ाने का फैसला लिया। उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाया और अब सोलक्राफ्ट को शुरू हुए 9 महीने पूरे हो गए हैं। 9 महीनों के इस काम में सोलक्राफ्ट ने डोनेशन और अन्य माध्यमों के ज़रिये लगभग 1200 स्कूली बच्चों तक ये स्कूल किट पहुंचाई है।

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सोलक्राफ्ट की इस टीम ने न सिर्फ स्कूल के बच्चो की मदद की है बल्कि ज़रूरतमंद लोगों को रोज़गार भी दिया है। फ़िलहाल सोलक्राफ्ट कंपनी में 5 कारीगर काम कर रहे हैं जो कि अपनी गृहस्ती चलाने के लिए महीने में 20 हज़ार रूपए तक कमा लेते हैं। ‘द बेटर इंडिया’ के साथ एक इंटरव्यू में मृणालिनी ने ये बताया है कि “बच्चों के लिए सस्टेनेबल फैशन”ये उनकी कंपनी की टैग लाइन है। उनका कहना है कि जीन्स को लोग कुछ समय में इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं लेकिन इस कपडे की खासियत है कि ये आसानी से घिसता नहीं है और लम्बे समय तक चलता है इसलिए उन्होंने इसे ही अपना टारगेट बनाया है। उन्होंने सोचा कि क्यों न जब लोग इन्हे इस्तेमाल करना छोड़ देते हैं उसके बाद वो इसका सही इस्तेमाल कर के लोगों की मदद करे। बस यही विचार था जिसने सोलक्राफ्ट की शुरुआत की।

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पुरानी जीन्स से स्कूल बैग, चप्पल और जूते बना कर गाँवों के सरकारी स्कूलों में बच्चों तक पहुंचाने का काम शुरू हो गया है और बच्चों तक मदद पहुंचाई जा रही है। बच्चों के डिज़ाइन किये गए इन स्कूल बैग को मृणालिनी खुद भी इस्तेमाल करती हैं और इतना ही नहीं वो जीन्स से बानी उन चप्पलों को भी पहन कर पहले परखती है और पूरी संतुष्टि के बाद ही उन्हें बच्चों के इस्तेमाल के लिए देती हैं। सोलक्राफ्ट की ये टीम पुरानी जीन्स के कपडे से से चप्पल और बैग बनती है जिन्हे वो बच्चों को देती है। इसके साथ ही वो नियम से उन स्कूलों का दौरा करती रहती हैं जहाँ पर उन्होंने अपनी किट को बच्चों तक पहुँचाया होता है। वो इस बात का पूरा ख़याल रखते हैं कि बच्चों के पास सामान सही हालत में रहे और उनके कटने फटने पर इसे रिप्लेस भी कर दिया जाए। फिलहाल मृणालिनी और उनके दोस्तों द्वारा शुरू किया गया ये काम जोधपुर तक ही सीमित है लेकिन उनका मानना है कि वो इसे और भी बड़े स्तर पर लेकर जायेंगे और ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की मदद करेंगे।

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टीम का लक्ष्य आने वाले दो सालो में इस किट को 1 लाख बच्चों तक पहुंचाने का है। सोलक्राफ्ट द्वारा बनाई गयी इस किट की कीमत 399 रुपय है जिसमे बैग, चप्पल, पेंसिल बॉक्स आदि शामिल हैं। काम के शुरूआती दौर में इन दोस्तों ने अपने पैसों से ही बच्चों की मदद की थी लेकिन अब सीएसआर की मदद से वो इस काम को बढ़ाने जा रहे हैं। आने वाले समय में वो डेनिम कलेक्शन ड्राइव शुरू करने जा रहे हैं जिसकी मदद से वो उन जींसों को इकट्ठा करेंगे जो लोगों के काम में नहीं आती हैं। इससे उनके पास ज़्यादा से ज़्यादा किट बनाने का सामान इकट्ठा होगा जिसका सीधा फायदा ज़रूरतमंद बच्चो को मलेगा। इसमें कोई शक नहीं है कि सोलक्राफ्ट की ये पहल बच्चों के लिए नयी उम्मीद बन कर आयी है।

the panchayat

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