ऐसा करते ही हो जाएगा ISRO का लैंडर विक्रम से संपर्क

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vikram lander

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का मोस्ट वांटेड प्रोजेक्ट मिशन चंद्रयान(Chandrayaan)-2 95 प्रतिशत तक सफल रहा था. लैंडर विक्रम से 2.1 किमी के फासले पर कनैक्शन(connection) टूट गया था. जिससे इसरो(ISRO) के वैज्ञानिकों के चेहरे उतर गए थे.

चंद्रयान 2 (फ़ाइल फ़ोटो)

फिर ऑर्बिटर की मदद से लैंडर की लोकेशन का पता लगाया. ऑर्बिटर ने विक्रम की लोकेशन को थर्मल इमेज़ के रूप में भेजी, जिससे पता चला की विक्रम तिरछा गिरा हुया है. एंटीना झुके हुये भाग में होने की वजह से ग्राउंड स्टेशन से संपर्क स्थापित नहीं कर सकता है. इसरो चीफ के सिवन ने मीडिया को बोला था कि लैंडर विक्रम से 14 दिन के अंदर-अंदर कनैक्शन वापस साधने के कोशिश करेंगे. लेकिन चार दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक कोई सफलता नही मिली है.

x band
X-band / फ़ोटो : csiro

इस बीच खबर सामने आई कि अब केवल X-band ही आखिरी उम्मीद है. जिसके प्रयास से शायद विक्रम से संपर्क हो सके. आपको बता दूँ कि X-band अमूमन रडार, सैटेलाइट कम्यूनिकेशन और कम्प्युटर नेटवर्क में यूज की जाती है. चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े एक वैज्ञानिक का कहना है कि कुछ ही ऐसे चैनल है जिसके जरिए लैंडर विक्रम और ग्राउंड स्टेशन से संपर्क साधा जा सकता है और वो X-band है.

विक्रम से संपर्क करने के लिए इसरो कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर के एंटीना का इस्तेमाल कर रहा है. इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरु में है. इसरो कोशिश कर रहा है कि ऑर्बिटर के जरिये विक्रम से संपर्क किया जा सके. इसरो के चेयरमैन ने कहा है कि वे अभी भी लैंडर के data का analysis कर रहे हैं. विक्रम को सिर्फ एक lunar day के लिए ही सूरज की सीधी रोशनी मिलेगी. इसका मतलब ये है कि 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिल पायेगी. ऐसे में इसरो इन 14 दिन तक अपनी कोशिश जारी रख सकता है. यानि अब लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए इसरो के पास सिर्फ 10 दिनों का समय बचा है.

vikram lander
लैंडर विक्रम / फ़ोटो : news18

सभी देशवासी लैंडर विक्रम और ग्राउंड स्टेशन के बीच फिर से communication establish हो जाए उसकी दुआ करते नजर आ रहे है. अगर लैंडर से connection हो जात है तो लैंडर के अंदर से रोवर प्रज्ञान बाहर निकलेगा और भारत का फूटप्रिंट छोड़ेगा. इसके साथ ही भारत चांद पर लैंड होने वाला चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले अमेरिका, रूस और चीन चांद पर लैंड कर चुके है. हालांकि भारत पहला देश होगा जिसने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड किया हो.

the panchayat

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