क्या वाकई मोदी सरकार के कहने पर छिन रहा है इन विपक्षी पार्टियों से राष्ट्रीय दल होने का टैग ?

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न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बीते दिनों एक खबर दी की चुनाव बढ़िया प्रदर्शन न करने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (ncp), तृणमूल कांग्रेस (tmc) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (cpi) से राष्ट्रीय दल होने का दर्जा छीना जा सकता है. अब बस इतनी खबर सामने आई थी की लोग हो गए चालू, सरकार को निरंकुश बताते हुए कहा गया की मोदी सरकार अलोकतांत्रिक तरीके से राज करना चाहती है इसलिए वो देश से बाकी पार्टियों का दमन करना चाहतीं है.लेकिन क्या सच में ऐसा कुछ करने के पीछे मोदी सरकार का कुछ हाथ होता है ?

असल में चुनाव कराने और चुनावी पार्टियों के बारे में कुछ भी फैसला लेने का अधिकार सरकार के पास नहीं होता बल्कि इसके लिए चुनाव आयोग का गठन किया गया है. देश में कब चुनाव होंगे, कहाँ होंगे, कितने चरणों में होंगे, ये सब डिसाइड करने के साथ ही चुनाव आयोग सभी राजनैतिक दलों के ऊपर भी अपनी कड़ी निगरानी रखती है.

अब आते हैं उस मुद्दे पर जो काफी फैलाया जा रहा है.तो जनाब जब सरकार के हाथ में चुनाव से सम्बंधित कुछ रहता ही नहीं तो बड़ी सीधी सी बात है की सरकार इसमें कुछ कर भी नहीं सकती।

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आगे बढ़े उससे पहले आपको बताते हैं की एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी को चुनाव में कितने प्रतिशत वोट लेने जरूरी हो जाते हैं.

निर्वाचन प्रतीक (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के तहत किसी राजनीतिक दल को तब राष्ट्रीय स्तर का दल माना जाता है जब उसके उम्मीदवार लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या अधिक राज्यों में कम से कम छह प्रतिशत वोट हासिल करें. इसके अलावा लोकसभा में उसके कम से कम चार सांसद हों. राष्ट्रीय पार्टी के पास कुल लोकसभा सीटों की कम से कम दो प्रतिशत सीट भी होनी चाहिए और इसके उम्मीदवार कम से कम तीन राज्यों से आने चाहिए.

खैर, लोग भले जो भी चर्चा कर रहे हो लेकिन सच्चाई यही है की पिछले दो लोकसभा चुनाव से ही ये पार्टियां राष्ट्रीय दल के लिए जरूरी वोट प्रतिशत को भी नहीं पा सकी. इनसे दर्जा छीनने की बात चुनाव आयोग ने आज नही उठाई बल्कि 2014 के लोकसभा चुनाव् में जब ये पार्टियां अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी तब भी निर्वाचन आयोग ने इनसे दर्जा छीनने की बात कही थी लेकिन ये पार्टियां तब चुनाव आयोग द्वारा किये गए नियमों में बदलावों के चलते बच गयी थी. चुनाव आयोग ने अपने नियमों में बदलाव करते हुए कहा था की अबसे राष्ट्रीय और राज्य स्तर की पार्टियों का फैसला हर ५ साल में नहीं बल्कि 10 साल में लिया जाएगा। तो ये दल तब तो राष्ट्रीय दर्जा छीनने से बच गए थे लेकिन फ़िलहाल इनके बचने की संभावना कम ही है और अगर इनसे राष्ट्रीय पार्टी का टैग छिनता है तो शायद उसका जिम्मेदार मोदी या चुनाव आयोग नहीं बल्कि इन पार्टियों का खुद का प्रदर्शन रहेगा।

the panchayat

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