शेम्पू से दूध बनाया और खरीद लिए 3 आलिशान बंगले, एसयूवी गाडियाँ और जमीने

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2 brothers turned millionaires in 7 yrs, sold synthetic milk in Delhi, UP

पहले का टाइम भी कितना मस्त था ना,हर घर में दूध, घी,दही मिल जाता और लोग उसको बेचने की बजाय पीते थे,यही वजह भी रही कि पहले वाले लोगों के शरीर भी आज के मुकाबले काफी तगड़े हुआ करते थे.लेकिन समय बदला और धीरे धीरे लोगों की सोच भी बदलती चली गयी जिस दूध दही को लोग बेचना अशुभ समझते थे उसको धड़ल्ले से बेचना शुरू कर दिया गया. और बस तभी से ही शुरू हो गया मिलावट का धंधा. मिलावट के इस धंधे से लोग बीमार हुए लेकिन बेचने वाला करोड़पति बनता चला गया।

एक ऐसा ही मामला सामने आया मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के ढकपुरा से,यहां दो भाई मिलावटी दूध और उससे बनने वाली चीजों को महंगे दाम में बेचकर करोड़पति बन गए. 2 सगे भाइयो ने सात साल तक ऐसा खेल खेला कि इन सात सालो में साइकिल से घूमने वाले दोनों भाई महंगी एसयूवी में घूमने लग गए.

क्या है पूरा मामला

हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, मुरैना जिले के ढकपुरा गाँव के 2 भाई देवेन्द्र गुर्जर(42) और जयवीर गुर्जर(40) ने कृत्रिम यानि मिलावटी दूध, चीज और मावा बना कर अपने ग्राहको को धीमे धीमे मरने के लिए छोड़ दिया था. मध्य प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने मिलावटी दूध की फैक्ट्रियों पर छापा मार कर इन दोनों भाइयो के करोड़पति होने के राज से पर्दाफाश किया.

दोनों भाई ये मिलावटी वाला दूध केवल मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी बेचा करते थे. मिलावटी दूध के निर्माण में ग्लूकोज, यूरिया, रिफाइंड ऑयल, मिल्क पाउडर और पानी के साथ साथ कुछ केमिकल्स जैसे हाइड्रोजन परऑक्साइड लगते है. दूध के साथ साथ दोनों भाई मिलावटी चीज और मावा भी बनाते थे.

एसटीएफ़ एसपी राजेश भदोरिया इस मामले में कहते है छानबीन के दौरान पुलिस ने मुख्य छ: दोषी देवेन्द्र गुर्जर, जयवीर गुर्जर, रामनरेश गुर्जर, दिनेश शर्मा, संतोष सिंह और राजीव गुप्ता ने अपनी संपत्ति में इजाफ़ा किया है. उन सब के रहन सहन में पिछले कुछ सालो में अचानक से ही बदलाव देखने को मिला. एक छोटे से डेयरी की दुकान से करोड़पति बनने तक का सफर बहुत ही जल्दी तय किया. इन सबके बही खाते पुलिस ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को सौंप दी है.

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सभी छ: दोषियो के ऊपर आईपीसी की धारा 420 धोखाधड़ी और खाद्य अपमिश्रण अधिनियम की रोकथाम के तहत धारा लगायी गयी है. भदोरिया आगे कहते है 1 लीटर मिलावटी दूध बनाने में केवल 6 रूपये लगते है जिन्हे होलसेल मार्केट में 25 रूपये में बेचते थे. सीधा सीधा उन्हे 70-75% मुनाफा हो रहा था. इन्होने इस मुनाफ़े से कृषि भूमि, मिल्क कंटेनर्स, मिल्क चिलिङ्ग प्लांट, बँगला, एसयूवी गाडियाँ और जमीने खरीदी.

चंबल के अंदर मध्य प्रदेश दुग्ध संघ ने 200 दुग्ध सहकारी समिति को बैन कर दिया है.

एसटीएफ़ के अतिरिक्त महानिदेशक अशोक अवस्थी का कहना है कि चंबल के अंदर हर रोज दूध का उत्पादन 11 लाख लीटर है लेकिन हमेशा 30 लाख लीटर दूध की आपूर्ति होती है. ये 19 लाख लीटर दूध मिलावटी दूध है जो कैंसर जैसी बीमारी बढ़ाती है.

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा की जल्दी से जल्दी गैर कानूनी तरीके से दूध उत्पादन को रोका जाये और स्वास्थय मंत्रालय 52 जिले में मिलावटी दूध की जानकारी देने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करे.

लोगो की जिंदगी से खेलने का हक किसी को भी नहीं है, मुनाफ़े के चक्कर में आप किसी की जिंदगी खतरे में नहीं डाल सकते. जो खिलवाड़ करते है उनके खिलाफ सही तरीके से कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

the panchayat

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