मार्केट की दिग्गज कंपनियाँ कैसे कमाती है लाखों-करोड़ो रुपए

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इंटरनेट आने के बाद दुनिया में एक क्रांति सी आ गयी थी. इंटरनेट के माध्यम से ही एक इंसान दूसरे इंसान को एक चुटकी के बजाने से कम समय में ही संदेश भेज सकते है. इंटरनेट के इतिहास में पहले केवल टेक्स्ट भेजा जाता है, लेकिन अभी टेक्स्ट के साथ-साथ वीडियो कॉल भी कर सकते थे. आज जानेंगे जो कंपनियाँ अपने ग्राहकों से एक पैसा भी नहीं लेती है वो कंपनियाँ लाखों-करोड़ों रुपए कैसे कमा लेती है? और साथ में कुछ नामचीन कंपनियों के बारे में भी जानेंगे. चलिये शुरू करते है.

फ़ाइल फ़ोटो

1. गूगल(अल्फ़ाबेट)

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गूगल / फ़ोटो : theverge

इंटरनेट की बात हो और गूगल की बात ना हो, ऐसे तो हो ही नहीं सकता है. अपनी पहली कंपनी भी गूगल ही है. जानते है गूगल अपना रेवेन्यू किस बेस पर जनरेट करती है. गूगल एक सर्च इंजिन है. सर्च इंजिन मतलब इंटरनेट पर यूजर्स द्वारा डाले गये डेटा को ढूंढ कर डेटा से संबन्धित सारी जानकारी स्क्रीन पर लाकर देना. जैसे कोई व्यक्ति लोनावला लिखता है तो सर्च इंजिन लोनावला से रिलेटेड सारी जानकारी स्क्रीन पर शो कर देता है. सर्च इंजिन बहुत सारे है लेकिन गूगल उन सब में से पॉपुलर सर्च इंजिन है. गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फ़ाबेट(ALPHABET) है. अल्फ़ाबेट कंपनी के रेवेन्यू का 88 प्रतिशत का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल एड वर्ड्स (Google Ad Words) और यूट्यूब (YouTube) से आता है. बाकी का गूगल प्ले सर्विस (Google Play Services) और पिक्सल (Pixel) से आता है.

alphabet google
अल्फ़ाबेट / फ़ोटो : wccftech

गूगल एड वर्ड्स यानि जो कंपनियाँ अपने प्रोमोशन के लिए एड देती है उनसे गूगल अपना पैसा कमाती है. ये एड्स (विज्ञापन) गूगल जो प्रोमोशन करते है उन्हे बेचती है. पिक्सल गूगल का स्मार्टफोन है, जो ग्राहक फोन खरीदेगा उससे गूगल पैसा कमाएगा. यूट्यूब पर वीडियो में एड आते है उससे गूगल पैसा कमाता है और गूगल प्ले सर्विस में जो एप या गेम अपलोड किए जाते है उनकी फीस से गूगल पैसा कमाता है.

2. फेसबुक

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फेसबुक / फ़ोटो : nme

दुनिया का सोशल नेटवर्किंग प्लैटफ़ार्म में सबसे ज्यादा यूज किया जाने वाला एप्लिकेशन फेसबुक(Facebook) है. किसी का जन्मदिन हो या किसी के निधन की ख़बर, जीत की ख़ुशी हो या गमगीन माहौल हो सब का स्टेटस फेसबुक पर डालना एक आम बात है. 2004 में बनी फेसबुक का शुरू से ही पैसे कमाना का जरिया एड्स(विज्ञापन) रही है. जितने ज़्यादा एड्स आएंगे उतनी ज़्यादा कमाई होती रहेगी. फेसबुक ही एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिये कंपनियाँ अपने प्रोडक्टस की ब्रांडिंग और प्रोमोशन आसानी से कर सकते है. क्योंकि अमूमन हर इंसान फेसबुक से जुड़ा हुया है. अगर घर के किसी एक व्यक्ति ने एक ब्रांड के प्रॉडक्ट देख लिए तो वो अपने परिचित लोगों को भी वो ही ब्रांड के प्रोडक्टस सजेस्ट करेगा. फेसबुक का 97 फीसदी पैसा केवल एड्स के भरोसे आता है.

3. अमेज़न

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अमेज़न / फ़ोटो : amazon

विश्व की सबसे बड़ी ऑनलाइन शॉपिंग साइट में अमेज़न(Amazon) का नाम सबसे ऊपर आता है. अमेज़न ने अपनी शुरुआत केवल बुक को ऑनलाइन बेचने के हिसाब से शुरू की थी. लेकिन बाद में अमेज़न के ऊपर बुक के अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल्स, फैशन वियर, फूटवियर, इत्यादि आइटम्स बेचने लग गयी. समय के साथ-साथ डिजिटल मार्केट में अपने पैर पसारे और उनमें भी सक्सेस हुई. डिजिटल में अमेज़न ने अपना प्राइम वीडियो और म्यूजिक निकाला और अमेज़न वेब सर्विस(AWS) के द्वारा भी अपना रेवेन्यू जनरेट करती है. अमेज़न का 72 प्रतिशत ग्राहक के द्वारा शॉपिंग से आता है. बाकी का प्राइम वीडियो और AWS से आता है.

4. एपल

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एपल / फ़ोटो : apple support

स्टीव जॉब्स की एपल कंपनी ज़्यादातर पैसे केवल अपने प्रोडक्टस की बिक्री पर ही कमाती है. जितना ज़्यादा उनके प्रोडक्टस बिकेंगे उतना ज़्यादा फायदा कंपनी को मिलेगा. एपल के मैनली बिकने वाले प्रोडक्टस में से एक उनके आईफोन्स(iPhones) ही है. उसके बाद उनके लैपटॉप्स और टैबलेट्स बिकते है. इनके फोन के एस्सेरीज़ से भी एपल अपना रेवेन्यू जनरेट करता है. इनके अलावा iCloud और iTunes से भी पैसे कमाते है. आपको बता दूँ कि एपल में सीमित मात्रा में एप्स या गाने फ्री के होते है, बाकियों के लिए आपको जेब ढीली करनी होती है. iPhone से एपल का 67 प्रतिशत, iTune/iCloud से 11 प्रतिशत रेवेन्यू जनरेट होती है.

5. माइक्रोसॉफ्ट

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माइक्रोसॉफ्ट / फ़ोटो : microsoft

बिल गेट्स वाली माइक्रोसॉफ्ट कंपनी मेरी लिस्ट की आख़िरी कंपनी है. आइये जानते है माइक्रोसॉफ्ट के कौन-कौन से प्रोडक्टस कंपनी के रेवेन्यू जनरेट करने में अपनी भूमिका निभाते है. माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी बेसिकली सॉफ्टवेयर बनाने का काम करती है. इसका सबसे पॉपुलर सॉफ्टवेयर का नाम विंडोज (Windows) है, जो अमूमन हर घर के लैपटॉप या डेस्कटॉप में मिल जाएगा. विंडोज एक ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसके बिना आपका कंप्यूटर चल भी नही सकता है. हालांकि ऑपरेटिंग सिस्टम के सॉफ्टवेयर बहुत सारे है लेकिन सबसे ज़्यादा इसका यूज लिया जा है. विंडोज के अब तक बहुत सारे वर्जन आ चुके है. लेटेस्ट वर्जन विंडोज 10 है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ़्ट डेली यूज करने वाले सॉफ्टवेयर जैसे माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस बनाती है. इसके साथ विंडोज सर्वर (Windows Server) और विंडोज अज्यूर (Windows Azure) बनाती है. गेम खलेने वालों के लिए Xbox भी बनाती है.

इसके रेवेन्यू जनरेट करने में सबसे बड़ी भूमिका यूटिलिटी सॉफ्टवेयर की है. 28 पर्सेंट एमएस-ऑफिस से, 22 प्रतिशत सर्वर सॉफ्टवेयर से, 11 फीसदी Xbox से, 9% Bing सर्च इंजिन से और बाकी के एड्स(विज्ञापन) और दूसरे सोर्स से रेवेन्यू आता है.

आशा करता हूँ कि अब आप समझ गए होंगे कि ये बड़ी-बड़ी कंपनियाँ अरबों रुपए कैसे कमाती है.

the panchayat

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