भारत की इकोनोमी को बूस्ट करने के लिए वित्त मंत्री ने किए 10 बड़ी घोषणाएँ

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निर्मला सीतारमण / फ़ोटो : hindustantimes.com

वैश्विक मंदी के चलते भारत में भी मंदी का असर देखने को मिला रहा था. शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वित्त मंत्री ने भारत की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कई बड़ी घोषणाएँ की.

सीतारमण द्वारा की गयी घोषणाएँ / फ़ोटो : bhaskar.com

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने देश के आर्थिक हालात के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था बाकी देशों की अर्थव्यवस्था से बेहतर है. भारत में मंदी जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन हम अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रहे हैं.

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निर्मला सीतारमण / फ़ोटो : hindustantimes.com

भारत की आर्थिक वृद्धि दर कई देशों की तुलना में ऊंची है. आर्थिक सुधार सरकार के एजेंडा में सबसे ऊपर है, सुधारों की प्रक्रिया जारी है, इसकी रफ्तार थमी नहीं है. उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) नियमों के उल्लंघन को दिवानी मामले की तरह देखा जाएगा, इसे आपराधिक मामलों की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी और घरेलू निवेशकों पर सरचार्ज बढ़ोतरी का फैसला वापस ले लिया गया है. यह मौजूदा वित्त वर्ष से ही लागू होगा. वित्त मंत्री ने शुक्रवार को डेढ़ घंटे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि सरकार अगले हफ्ते कुछ और ऐलान करेगी.

इसके अलावा आगे क्या होगा? 

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फ़ोटो : newstate.com


वित्त मंत्री ने पिछले दिनों इंडस्ट्री के लोगों के साथ बैठकें कर अर्थव्यवस्था के हालात पर चर्चा की थी. इसी आधार पर फैसले लेते हुए ग्रोथ में तेजी के लिए ऐलान किए गए. सरकार को अब उम्मीद है कि शेयर बाजार में निवेशक ठहरेंगे. बाजार में नकदी बढ़ने से कर्ज आसान होंगे. इन कदमों से अर्थव्यवस्था को फायदा होगा. सरकार अगले हफ्ते हाउसिंग सेक्टर के लिए भी ऐलान करेगी.

जानते है वित्त मंत्री ने क्या ऐलान किया?

1) सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शुरुआती दौर में ही 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी ताकि बैंक बाजार में पांच लाख करोड़ रुपये तक की नकदी जारी करने में सक्षम हो सकें. छोटे एवं मंझले उद्यमों (MSME) के अब तक के सभी लंबित GST रिफंड का भुगतान 30 दिन के भीतर कर दिया जाएगा. सरकारी बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि लोन पूरा होने के बाद ग्राहकों को उनकी संपत्ति के दस्तावेज 15 दिन में लौटा दिए जाएं.

2) सरकारी बैंकों के लिए 70 हजार करोड़ रुपये जारी किए जाएंगे. सरकार पर टैक्स को लेकर लोगों को परेशान करने वाले आरोप झूठे हैं. हम GST की प्रक्रिया को और सरल बनाने जा रहे हैं, टैक्स से जुड़े कानूनों में भी सुधार होगा.

3) कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के नियमों का उल्लंघन कानूनी अपराध नहीं माना जाएगा. इसे केवल सामाजिक जिम्मेदारी के तौर पर ही देखा जाएगा.

4) मार्च 2020 तक खरीदे गए भारत मानक- चार (BS – IV) के वाहन पंजीकरण की पूरी अवधि तक वैध रहेंगे. सरकार पुराने वाहनों के लिये कबाड़ नीति लाएगी. वित्त मंत्री ने सरकारी गाड़ियों की खरीद पर लगी रोक को भी हटाने की घोषणा की.

5) FPI, घरेलू निवेशकों से ‘सुपर रिच’ टैक्स वापस लेने से सरकार को 1,400 करोड़ रुपये भी देगी. साल 2019-20 के बजट में ऊंची कमाई करने वालों पर ऊंची दर से टैक्स सरचार्ज लगा दिया गया था.

6) स्टार्टअप्स और उनके निवेशकों की दिक्कतों को दूर करने के लिए उनके लिए एंजल टैक्स को भी वापस लेने का फैसला किया गया है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के सदस्य के तहत स्टार्टअप्स की समस्याओं के समाधान के लिए एक स्पेशल सेल बनाया जाएगा. स्टार्पअप आयकर से जुड़े मुद्दों को इस सेल के जरिए तेजी से निपटा सकेंगे.

7) इसी तरह हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को भी 30 हजार करोड़ रुपये दिए जाएंगे. टैक्स और लेबर कानूनों में लगातार सुधार हो रहा है. आर्थिक सुधारों की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है. इनकम टैक्स रिटर्न भरना पहले से काफी आसान हुआ है. आगे GST को और आसान बनाया जाएगा.

8) आधार बेस्ड KYC के जरिए डीमैट और म्युचुअल फंड में निवेश करने के लिए अकाउंट खोलने की इजाजत होगी. वहीं, अब MSME की केवल एक परिभाषा होगी, इसके जरिए कंपनियां अपने काम आसानी से कर सकती हैं. MSME एक्ट को जल्द ही कैबिनेट के सामने ले जाया जाएगा.

9) लोन क्लोज होने के बाद सिक्यॉरिटी रिलेटेड डॉक्यूमेंट बैंकों को 15 दिन के भीतर देना होगा. लोन आवेदन की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी. वहीं, अब लोन खत्म होने के 15 दिन के अंदर कागजात देने होंगे.

10) लॉन्ग, शॉर्ट टर्म कैपिटेल गेन सरचार्ज वापस लिया जाएगा. सरकार ease of doing business और ease of living पर फोकस कर रही है. अब विजयादशमी से केंद्रीय सिस्टम से नोटिस भेजे जाएंगे. टैक्स के नाम पर किसी को परेशान नहीं किया जाएगा. टैक्स उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगेगी.

इसके अलावा टैक्स संबंधी नोटिस कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से ही जारी होगा और कंप्यूटर जेनरेटेड यूनिक डॉक्यूमेंट आईडेंटिफिकेशन नंबर के बिना कोई भी कम्युनिकेशन वैध नहीं माना जाएगा. जिससे करदाताओं को परेशान करने की घटनाएं रुकेंगी.

सरकार को ये घोषणाएँ क्यों करनी पड़ी?

  1. जीडीपी ग्रोथ रेट बीते वित्त वर्ष (2018-19) में घटकर 6.8 रह गई. यह 5 साल में सबसे कम है.
  2. औद्योगिक उत्पादन दर जून में घटकर 2% रह गई. यह 3 महीने में सबसे कम है.
  3. बजट के बाद से अब तक सेंसेक्स में 8% गिरावट आई.
  4. यात्री वाहनों की बिक्री जुलाई में 19% घट गई. यह 19 साल में सबसे बड़ी गिरावट है.
the panchayat

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