धोनी भले क्रिकेट छोड़ दे लेकिन उनकी इन पारियों को कभी कोई नहीं भूलेगा

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एमएस धोनी (Ms Dhoni) ये महज एक नाम नही है,बल्कि वो अनमोल सितारा है जिसने भारतीय क्रिकेट (Cricket) में आने के बाद से कई यादगार पारियां खेलकर भारत का नाम पूरी दुनिया भर में चमकाया है. कई मौकों पर उन्होने विरोधी टीम के मुँह से जीत छीनकर भारत की झोली में डाली. आज हम आपको धोनी की 5 यादगार पारियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे धोनी की क्लास (class) को आप महसूस कर सकेंगे.


टेस्ट मैच में धोनी का कमाल 
2012-13 सीजन में बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का पहले मैच पहला मैच खेला जा रहा था. ये मैच चेन्नई में था. टॉस ( toss) जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया ने 380 रन बनाये और ऑलआउट हो गई। भारत की तरफ से उस मैच में धोनी ने मोर्चा संभाला और कप्तानी पारी खेलते हुए 224 रन बनाये. वर्तमान टीम कैप्टेन विराट कोहली (virat kohli) ने उनका भरपूर साथ दिया। भारत ने 5वें दिन आसानी से मैच जीत लिया।

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वनडे क्रिकेट में लगाई लंबी छलांग.

2005-06 सीजन की बात है. जयपुर (jaipur) के सवाई मान सिंह स्टेडियम में भारत और श्रीलंका के बीच मैच खेला जा रहा था. इस मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर कुमार संगाकार के 138 रन की बदौलत भारत के सामने 299 रन का लक्ष्य रखा। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के रूप में भारत का पहला विकेट जल्दी गिरने के बाद टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सबको चौंकाते तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे। इसके बाद उन्होंने जो पारी खेली उसको भूलना बेहद मुश्किल है. धोनी ने उस मैच में 10 छक्के और 15 चौके जड़ते हुए 183 रन की पारी खेली। 

जब पड़ोसियों की रेल बनाकरख दी.


2004-05 सीजन की बात है भारत और पाकिस्तान विशाखापट्टनम में आमने सामने थे।  मुकाबले में भारत की तरफ से सौरव गांगुली कप्तानी कर रहे थे। भारत ने टॉस जीता और  बल्लेबाजी की. लेकिन दिलचस्प बात ये रही कि पहला विकेट जल्दी गिर गया जिसके बाद धोनी मैदान पर आए।

इसके बाद उन्होंने मैदान के चारों ओर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को खूब दौड़ाया. जहां उनका मन किया बॉल को धड़ल्ले से वहीं पहुचां दिया.आपको बता दे कि ये वही दौर था जब धोनी के बड़े-बड़े बाल उनकी पहचान हुआ करते थे। उनके 148 रन की बदौलत भारत ने 356 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में पाकिस्तानी टीम ने 298 रन पर ही ऑल आउट हो गयी जिसके चलते भारत मैच जीत गया.

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कंगारुओं को मिला करारा जवाब-

2009-10 सीजन था,भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच सीरीज का दूसरा मैच नागपुर में खेला जा रहा था.  ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीता और भारत के कप्तान को कहा कि पहले आप बल्लेबाजी के लिए उतरे। इसी मुकाबले  में पांचवे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे धोनी ने 107 गेंदों में 124 रन की पारी खेली और भारत का स्कोर 354 रन तक पहुंचा दिया। जवाब में  ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए ये स्कोर पहाड़ जैसा साबित हुआ और वो 255 रन पर ढेर हो गई।

श्रीलंका के मुँह से जीत निकालकर भारत के खाते में डाली


ये वो जीत थी जिसने भारत को दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनाया था. साल था 2011,भारत के सामने श्रीलंका थी और वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला खेला जा रहा था। श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की और जयवर्धने के शतक की बदौतल भारत के सामने 275 रन का लक्ष्य रखा। 275 रनों का पीछे करने उतरी भारत की शुरुआत खराब रही और ओपनर वीरेंद्र सहवाग बिना खाता खोले आउट हो गए। लेकिन दूसरे सलामी बल्लेबाज गौतम गम्भीर टिके रहे और उन्होमे 97 रन की ज़ोरदार पारी खेली. धोनी भी गौती के साथ क्रीज पर डंटे रहे और छक्का जड़कर ही मैदान से बाहर आये.

ये वो मोमेंट था जिसको भूलना हर किसी के लिए काफी मुश्किल होगा.वाकई धोनी (dhoni) ने दिखा दिया कि उन जैसा होना बहुत मुश्किल है.

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