बाबा बर्फानी का भक्त एक मुस्लिम परिवार

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Amarnath Yatra went on pilgrimage after Army's terror attack revealed, pilgrims advised to leave Jammu and Kashmir
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सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है और आज सावन का पहला सोमवार है. सावन का महिना महाकाल के भक्तों के लिए नवरात्रि से कम नहीं होता है. सावन महीने में सोमवार को ज्यादा तवज्जो दी जाती है. क्योंकि सोमवार का दिन हिन्दू सभ्यता के अनुसार हिन्दू आराध्य देव महादेव का दिन होता है. इसलिए सोमवार के दिन बाकी दिनों से ज्यादा श्रद्धालु शंकरा की उपासना करने मंदिर जाते है. अमरनाथ यात्रा भारत की सबसे कठिन यात्रा है. इस यात्रा की चढ़ाई करने के बाद जो बाबा बर्फानी के दर्शन होते है वो अमूल्य दर्शन होते है.

screen shot of amarnath yatra website

बाबा बर्फानी की गुफा की खोज एक मुस्लिम बूटा मलिक ने की थी. बूटा मलिक गड़रिया था. वो अपने मवेशी चरा रहा था तो उसके आस एक संत आए और उसे एक कोयले से भरी बोरी देते है. वो बोरी अपने घर जाकर खोलता है और सोने के सिक्के देख कर वो खुशी से झूम उठता है. वो उस संत को शुक्रिया कहने के लिए वापस संत के पास जाता है लेकिन वो संत उसे नही मिलते है. उसकी जगह वो एक गुफा देखता है जिसके अंदर बर्फ से बने शिवलिंग को पाता है. ये बात वो सारे गाँव वालो को बताता है फिर उसके बाद यह जगह श्रद्धालुओ के लिए पवित्र जगह बन गयी. इसकी जानकारी आप अमरनाथ श्राइन बोर्ड के ऑफिशियल वेबसाईट पर भी देख सकते है.

वेबसाइट : shriamarnathjishrine

#मुस्लिम उपासक

बूटा मलिक [ Buta Malik ]के वंशज महादेव को मानते और उसकी उपासना भी करते है. ये परिवार नमाज भी अदा करता है और सावन के महीने में महादेव की उपासना भी करता है. बूटा मलिक की सातवी पीढ़ी के चिराग मलिक अफजल कहते है उनके पूर्वज पहलगाम में ही रहे है और वो 2002 तक बाबा बर्फानी की पूजा अर्चना और राखी बंधवाते आए है. पेशे से इंजिनयर मलिक अफजल आगे कहते है कि जब तक यात्रा चलती है तब तक उनका परिवार मांस को भी हाथ नहीं लगाते. उनके लिए भी महाकाल उतने ही प्रिय है जितने हिन्दू श्रद्धालु को है. इसमें कोई बुराई नहीं है कि उनका परिवार तिलक लगाए.

Buta Malik

अफजल कहते है 2002 से पहले जो धन राशि श्रद्धालुओ द्वारा अर्जित की जाती थी उसके तीन हिस्से होते थे एक हिस्सा वहाँ के पुजारियो को, दूसरा हिस्सा सरकार को और तीसरा हिस्सा बूटा मलिक [ Buta Malik ] के वंशज को यानि उन्हे मिलता था. लेकिन बोर्ड के नए नियमो के अनुसार अब वो हिस्सा उन्हे नहीं मिल रहा है. सरकार कहती है मलिक अफजल एक मुश्त राशि बोल दे जो सरकार मलिक को दे देंगे. आप कैसे एक मंदिर या मस्जिद को एक मुश्त राशि में बेच सकते हो. इसलिए मलिक ने अभी तक इस बारे में कुछ बोला नहीं है. इसी हिस्से की बदौलत ही उनके पूर्वज अपनी आजीविका चला रहे थे.

#श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि

वर्ष 2016 से वर्ष 2018 तक अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओ की संख्या में इजाफा हुआ है. इससे जम्मू-कश्मीर के पर्यटन को बढ़ावा मिला है. 2016 में श्रद्धालुओ की संख्या 2 लाख 20 हजार. साल 2017 में 2 लाख 60 हजार और साल 2018 में श्रद्धालुओ की संख्या 2 लाख 85 हजार थी. तकरीबन 65 हजार श्रद्धालुओ की संख्या बढ़ गयी. इस साल भी उम्मीद यही की जा रही है कि श्रद्धालु की संख्या मे बढ़ोतरी हो जिससे पर्यटन विभाग को आगे बढ़ने का मौका मिले.

भोले भण्डारी सब पर अपनी कृपा बनाए रखे और इसी तरह हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश देते रहे. कुछ उपद्रवियों के कारण दोनों कौम में तनाव पैदा हो जाता है, उन उपद्रवियों की ना सुनते हुये भाईचारे से रहे. शांति बनाए रखे.

the panchayat

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