सदन के अगले सत्र में पेश होगा धर्मांतरण विरोधी बिल

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anti conversion bill

नरेंद्र मोदी सरकार का नया वर्जन 2.0 अपने फुल फ़ॉर्म में है. फ्रंटफुट हो या बैकफुट सब जगह से गेंद बाउंडरी के बाहर ही जा रही है यानि कि मोदी सरकार ने अब तक 34 विधेयक संसद से पारित करवा चुकी है. अभी ख़बर आई है कि संसद के अगले सत्र में एक ओर बिल पेश किया जायेगा.

हाँ जी, आपने सही सुना. मोदी सरकार सदन के अगले सत्र में एक ओर बिल पेश करेगी. इस बिल का नाम धर्मांतरण विरोधी बिल है. इस बिल के तहत अगर किसी व्यक्ति का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया जायेगा तो जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने वाले के ऊपर मुकदमा दर्ज़ होगा. हालांकि, पिछली सरकार में संसदीय कार्य मंत्री रहे वेंकैया नायडू ने सभी दलों से धर्मांतरण पर एक राय से कानून बनाने की अपील भी की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था. अब एक बार फिर से मोदी सरकार इस बिल को लाने पर विचार कर रही है.

भाजपा शुरू से ही धर्मांतरण के ऊपर अपनी आवाज उठाती आई है. संसद में कई बार पार्टी नेता इस मुद्दे को उठा चुके हैं. केरल और पूर्वोत्‍तर के राज्‍यों के अलावा कई जगहों पर धर्मांतरण कई बार बड़ा मुद्दा बनता रहा है. भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने तो बाकायदा धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए लंबी मुहिम चलाई है और इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है. उनका कहना है कि “देश के कई राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है.” उपाध्याय के मुताबिक “लक्षद्वीप और मिजोरम में हिंदू अब मात्र 2.5% तथा नागालैंड में 8.75% बचे हैं. मेघालय में हिंदू अब 11%, कश्मीर में 28%, अरुणाचल में 29% और मणिपुर में 30% बचे हैं.”

इसके अलावा भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने कह रहे है कि जिस प्रकार के प्लान से धर्म परिवर्तन हो रहा है यदि उसे नहीं रोका गया तो आने वाले 10 सालों में परिस्थिति बहुत ही ज़्यादा ख़राब हो जायेगी. उपाध्याय ने कहा कि देश के कई राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है और उत्तर पूर्व के राज्यों में धर्मांतरण कराने के लिए हिंदू नहीं बचे हैं इसलिए वे अब उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में गरीबों का धर्मांतरण कर रहीं हैं. पिछले 10 साल में इन्होंने हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भी किसान, मजदूर, दलित शोषित और पिछड़ों को टारगेट करना शुरू कर दिया है. ऐसे में संसद के दोनों सदनों से बिल का पास होना बहुत ज़्यादा जरूरी है.

फ़ोटो : prabhasakshi

RSS के मुख्य प्रवक्ता मनमोहन वैद्य भी इस धर्मांतरण विरोधी कानून के पक्ष में है, उनका कहना हैं कि “देश में लगातार धर्म परिवर्तन की ख़बरे सामने आती रही है ऐसे में सरकार को किसी और तरह की रोक की बजाए एक सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लाना चाहिए, ताकि इस तरीके के मामले को रोका जा सके.”

जिस तरह से मोदी सरकार इस धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए संसद में बिल पेश करने में मुकर है उस हिसाब से विपक्षी पार्टी इस बिल का विरोध भी नहीं कर पाएगी. क्योंकि धर्म परिवर्तन के मामले बहुत ही ज़्यादा देखने को मिल रहे है.

the panchayat

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