तीन तलाक बिल पास होने के बाद भी आखिर क्यों नहीं है लोगों के अंदर डर ?

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देश भर में तीन तलाक की घटनाओं को लगातार बढ़ते देख कर सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार को कानून बनाने के लिए कहा। जिसके बाद मोदी सरकार ने तीन तलाक के लिए कानून बनाने का फैसला लिया। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरू होने के बाद हाल ही में तीन तलाक बिल को पास करवा के कानून बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने ये फैसला 19 सितम्बर 2018 में लेने के लिए कहा था हलाकि सरकार ने इसे 2019 में कानून बनाया है। लेकिन बताया ये जा रहा है तीन तलाक के वो सभी मामले जो 19 सितम्बर 2018 के बाद दर्ज हुए हैं उन सभी मामलों को सुलझाया जायेगा। इसके बाद मुस्लिम महिलाओं को अब इसका कितना लाभ मिलेगा ये तो वक़्त ही बताएगा। आपको बता दें कि सरकार के इस फैसले के बाद देश भर में भारी मात्रा में लोगों ने इसका समर्थन किया वही मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसके विरोध में है।

source : Hindustan Times

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खैर पक्ष-विपक्ष तो राजनीती के दो पहलू हैं लेकिन यहाँ ध्यान देने वाली बात ये है कि सरकार ने कानून बना तो दिया लेकिन क्या लोग इसे गंभीरता से ले रहे हैं? शायद नहीं, क्योंकि सरकार के बिल पास करने और कानून बनाने के बाद भी तीन तलाक की घटनाओ पर रोक नहीं लग रही है। फिलहाल का आलम ये है कि तीन तलाक के कानून से लोग डर नहीं रहे हैं और लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां आदमी अपनी पत्नी को तीन बार तलाक बोल कर छोड़ देता है। आपको बताते हैं वो मामले जो इस फैसले को लेने के बाद सामने आये हैं।

पहला मामला 2018 का है जब उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में रहने वाली महिला को उसके पति ने संयुक्त अरब अमीरात से फ़ोन पर मैसेज कर के तलाक़ दे दिया। वहीँ इस मामले के सामने आने के एक दिन बाद ही ऐसे दो और मामले सामने आये। इनमे से एक में शोहर ने अपनी बेगम को इसलिए तलाक दे दिया क्यों की वो अपनी मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटी की ज़िम्मेदारी से बचना चाहता था। इसी तरह एक और मामले में पीड़ित महिला ने बताया की उसके पति ने उसे फ़ोन पर तलाक दे कर रिश्ता खत्म कर दिया और इनके तलाक की वजह थी लड़की का काला रंग। देश में ऐसी ही मामूली सी बातो पर तीन बार तलाक बोल के आदमी अपनी बेगमों के साथ रिश्ते ख़त्म करते आये हैं जिनका खामियाजा औरतो को भुगतना पड़ता है।

ये मामले तो 2018 के थे लेकिन 2019 में सख्त कानून बनने के बाद भी तीन तलाक की घटनाओं का सिलसिला कम नहीं हुआ। सीएनएन की खबर के अनुसार 19 अगस्त को उत्तर प्रदेश के अमराई गाँव की रहने वाली सिमी को उसके पति ने लखनऊ की एक अदालत में तीन बार तलाक कहा और सिमी को तलाक दे दिया। सिम्मी के पति का नाम सईद रशीद है जिसने अदालत में अपने वकील के सामने बीवी को तलाक दिया। तलाक की वजह आप जानेंगे तो आप भी हैरान रह जायेंगे। रशीद ने सिमी को तलाक इसलिए दिया क्योंकि सिमी ने रशीद से chewing gum लेने से इनकार कर दिया था। वजह वाकई चौकाने वाली है। आपको बता दें कि सिमी ने अपने पति और ससुराल के परिवार वालो पर दहेज़ और उत्पीड़न का आरोप भी लगाया है जिसकी सुनवाई के लिए वो लोग लखनऊ की अदालत में गए थे। बताया जा रहा है कि सिमी नाम की महिला अपने वकील से दहेज़ के मामले पर कुछ बात कर रही थी जब उसके पति ने उसे chewing gum दी लेकिन सिमी ने लेने से इनकार कर दिया। इस बात से रशीद को गुस्सा आया और उसने तलाक दे दिया। मामले को पुलिस ने दर्ज कर लिया है और इस पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

कानून तो सरकार बनाती रहती है लेकिन देखना ये होता है कि लोग उसको कितना मानते हैं और कितनी गंभीरता से लेते हैं। देखा जा सकता है कि अब भी लोगों के अंदर सरकार के बनाये कानून का डर नहीं है। और अगर उनके अंदर ये डर पैदा करना है तो सरकार को कड़े नियम बनाने होंगे। सिर्फ केंद्र सरकार ही नहीं बल्कि सभी राज्यों की राज्य सरकारों को भी मिल कर इसके खिलाफ कदम उठाना होगा और पुलिस में दर्ज हुए मामलों पर ध्यान होगा। वरना तीन तलाक पर बना ये कानून महज़ एक कागज़ पर ही रह जायेगा और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं पर अत्याचार होता रहेगा।

the panchayat

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