ऑटोमोबाइल सेक्टर में 19 साल की सबसे बड़ी गिरावट, 10 लाख नौकरियों पर खतरा

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भारत की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है, इसमें कोई दो राय नहीं है. भारत इकॉनोमी के लिहाज़ से दो पायदान खिसक कर 7वें स्थान पर आ गया है. देश अभी मंदी के दौर से गुजर रहा है जिसका असर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्रीज़ पर भी दिखाई दे रहा है. करीब 2.30 लाख लोग अपनी नौकरियाँ गवा चुके है.

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दरअसल, ऑटो सेक्टर में मंदी का प्रभाव कुछ ज़्यादा ही देखने को मिला है. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल एंड मैन्युफैक्चर्स (SIAM) के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर कहते है कि ” पिछले 19 सालों के बाद ऐसी मंदी देखने को मिली है. पिछली मंदी दिसंबर 2000 में देखने को मिली थी. ” इसके आगे कहते है “इस वक्त ऑटो सेक्टर में 10 लाख नौकरियां जाने का खतरा पैदा हो गया है. अगर स्थिति न सुधरी तो यह संख्या और बढ़ सकती है. “

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फोटो : businessworld.com

आरबीआई के अनुसार ” कुछ सेक्टरों में स्लोडाउन का साया गहरा होता जा रहा है. इसमें ऑटो सेक्टर प्रमुख है, जहां मांग लगातार घट रही है. इसके कारण वाहनों की खरीदारी कम होती जा रही है. इससे ऑटो कंपनियों को कम उत्पादन और सरप्लस स्टाफ की छंटनी करनी पड़ रही है. “

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फोटो : newsnation.in

जुलाई माह तक की बात करें तो 2019 में ऑटो सेक्टर की बिक्री में 18.71 फीसदी कमी आई है. इनमें दुपहिया और तिपहिया वाहन भी शामिल हैं. जुलाई माह तक इस साल 18 लाख 25 हजार 148 वाहनों की बिक्री हुई थी, जबकि 2018 के जुलाई माह में 2 लाख 45 हजार 223 थी, जो कि पिछले साल की तुलना में लगभग 4.20 लाख कम है.

वाहनों की ब्रिकी में लगातार गिरावट

यात्री वाहनों की बिक्री जुलाई में लगातार नौवें महीने गिरी है. जुलाई 2018 में यात्री वाहन 2 लाख 90 हजार 931 बिके थे जो घटकर जुलाई 2019 में यात्री वाहन 2 लाख 790 ही बिके. यानि की 30.98 फीसदी गिरावट. सियाम के आंकड़ों के मुताबिक घरेलू बाजार में कार की बिक्री 35.95 प्रतिशत टूटकर 1,22,956 वाहन रही. जो जुलाई 2018 में 1,91,979 वाहन थी.

इसी तरह मोटरसाइकिल की घरेलू बिक्री पिछले महीने 9,33,996 इकाई रही जो जुलाई 2018 की 11,51,324 इकाई बिक्री के मुकाबले 18.88 प्रतिशत कम है. जुलाई 2019 में दुपहिया वाहनों की कुल बिक्री 15,11,692 वाहन रही. जुलाई 2018 में यह आंकड़ा 18,17,406 वाहन थे यानि 16.82 प्रतिशत गिरावट.

Auto sector crisis

व्यापारिक वाहनों में भी गिरावट देखने को मिली. ये 25.71 प्रतिशत घटकर 56,866 वाहन रही जो पिछले साल जुलाई में 76,545 वाहन थी. विविध श्रेणियों में कुल वाहन बिक्री जुलाई में 18.71 प्रतिशत गिरकर 18,25,148 वाहन रही जो जुलाई 2018 में 22,45,223 वाहन थी.

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फोटो : thecoastnews.com

अगर बहुत जल्द इस सेक्टर में सुधार के लिए ठोस कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले दिनों में 10 लाख लोग बेरोजगार हो सकते हैं. मांग में भारी कमी है, जिसकी वजह से सभी कंपनियों ने प्रोडक्शन या तो कम कर दिया है या रोक दिया गया है. यह हाल पिछले कई महीनों से है, जिसकी वजह से उन्हें सभी कर्मचारियों को सैलरी देना महंगा पड़ रहा है. देश में करीब 300 डीलरशीप तो बंद हो चुकी है. ऐसे में ट्रेन्ड स्टॉफ को छोड़ दें तो हेल्पर लेवल पर छंटनी शुरू हो चुकी है. इन लोगों का मानना है कि ट्रेन्ड कर्मचारियों को बाद में खोजना मुश्किल होता है. इनके पीछे क्या कारण है वो जानते है.

ऑटो सेक्टर में मंदी के प्रभाव के कारण

  1. आमदनी – सबसे हैरत वाले आंकड़े ट्रैक्टर की बिक्री के हैं. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ट्रैक्टर की बिक्री में 10 से 12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. इसके पीछे कारण है रबी फसल की पैदावार में कमी और खरीफ फसलों की बुवाई में गिरावट. इससे ग्रामीण लोगों की आमदनी में कमी आ रही है. इसके अलावा ट्रक में लोड को लेकर सरकार के बनाए सख्त नियम भी असर दिखा रहे हैं. इससे ट्रकों की बिक्री भी घटी है.
  2. फाइनेंशियल कंपनियाँ – ग्रामीण इलाको में गाड़ियों की फंडिंग नॉन बैंकिंग फाइनैंशल कंपनी (एनबीएफसी) की तरफ से की जाती है. इस वक्त अधिकांश एनबीएफसी खुद वित्तीय संकट में फंसी हैं. वे अपने लोन की वसूली नहीं कर पा रही हैं. इससे नए लोन देने में असमर्थ है. इसलिए उन्होंने उधार देना कम कर दिया है.
  3. नया इंजन – अभी ग्राहक नये बीएस-6 इंजन का इंतज़ार कर रहे है. सरकार ने सभी गाड़ी बनाने वाली कंपनियों को 1 अप्रैल 2020 तक अपने वाहनों में बीएस-6 इंजन लगाना अनिवार्य कर दिया है. अभी बीएस-4 इंजन लगता आया है. बीएस-6 से डीजल वाहनों से 68% और पेट्रोल वाहनों से 25% नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा.

ऑटो सेक्टर वाले सरकार से क्या चाहते है?

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फोटो : autotechreview.com

देश में वाहनों की मांग में गिरावट से पीड़ित भारतीय ऑटोमोटिव उपकरण निर्माता संघ (एक्मा) के अध्यक्ष राम वेंकटरमानी ने सभी प्रकार के ऑटो उपकरणों पर जीएसटी की दर को एक समान 18 प्रतिशत किए जाने की गुहार लगाई है. फिलहाल जीएसटी की दरें 18 और 28 प्रतिशत हैं.

सरकार का क्या कहना है?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “ऑटो सेक्टर की बात करें तो वित्त मंत्री ने इस सेक्टर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की है. इस सेक्टर में सुस्ती असल में कर्ज में तंगी, कुछ नियामक बदलाव और मांग में कमी की वजह से हैं.” उनका मानना है कि जल्दी हालात बदलेंगे और यह सेक्टर फिर से तेजी हासिल करेगा. उन्होंने बैंकों से आग्रह किया वे सस्ते कर्ज का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएं. इससे मंदी से निपटने में मदद मिलेगी.

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