बेरोज़गारी ने किये पुराने सभी आंकड़े पार, वादों पर काम नहीं कर रही है सरकार

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देश में बेरोज़गारी एक अहम मुद्दा है ये तो सब जानते हैं। लेकिन क्या लोग ये जानते हैं कि देश में बेरोज़गारी कितनी तेज़ी से बढ़ रही है। देश के युवा नौकरियों के लिए परेशान हो रहे हैं। मोदी सरकार ने भी चुनावों के दौरान बेरोज़गारी को ख़त्म करने का वादा किया था। लेकिन देश की हालत देख के ऐसा लग रहा है कि मोदी सरकार अपने वादे भूल गयी है। अब आप सोच रहे होंगे कि हम ऐसा क्यों कह रहे है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि देश में आर्थिक मंदी का दौर है और ऐसे में भारी मात्रा में लोग बेरोज़गार होते जा रहे हैं। जानते हैं पिछले कुछ सालों में देश में बेरोज़गारी का स्तर कितना गिरा है।

इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार 2017-2018 के सर्वे में ये जानकारी मिली है कि देश में बेरोज़गारी का स्तर 6.1 प्रतिशत हो गया है। सर्वे रिपोर्ट की माने तो पुरुषों में ये 1977-1978 से लेकर अब तक की सबसे ख़राब स्थिति है वही महिलाओं की बेरोज़गारी की बात करे तो 1983 से लेकर अब तक की ये सबसे ख़राब तस्वीर बन गयी है। बेरोज़गारी के आंकड़े अगर शहर में देखे तो महिलाओं में ये 10.8% है वही 7.1% पुरुष बेरोज़गारी की मार को झेल रहे हैं। अगर ग्रामीण क्षेत्र की बात करे तो पुरुष 5.8% और महिलाएं 3.8% बेरोज़गार हैं। आपको बता दें कि शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोज़गारी का स्तर ज़्यादा इसलिए है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहर में ज़्यादा मात्रा में महिलाये शिक्षा लेती हैं लेकिन वहीँ गाँवो में महिला शिक्षा अभी इतनी प्रचलित नहीं हुई है। यही वजह है की शहर में महिलाओं का बेरोज़गारी स्तर ज़्यादा है।

अगर बताये गए आंकड़ों से भी आपको बेरोज़गारी का स्तर समझने में परेशानी हो रही है तो अब उसको हम सरल शब्दों में बताएंगे। बेरोज़गार लोगों की संख्या की बात करे तो 2017-2018 में बेरोज़गारी की संख्या 2011-2012 की तुलना में दो गुणा से भी ज़्यादा थी। जहाँ 2011-2012 में 108 लाख लोग बेरोज़गार थे वही 2017-2018 ये संख्या बढ़ के 285 लाख हो गयी। हैरान करने वाली बात अब ये है कि 2011-12 से 2017-18 के बीच मात्र 5 लाख नयी नौकरिया जुड़ने के कारण 180 लाख लोगों को हालातों के चलते मज़दूरी का साथ पकड़ना पड़ा।

बेरोज़गारी की बात को आगे बढ़ाएं तो आंकड़े सही होने की जगह और भी ज़्यादा ख़राब होते दिखेंगे। बेरोज़गारी के स्तर में भारत के कई राज्य जैसे राजस्थान, हरयाणा, पंजाब, ओडिशा, गोवा,मणिपुर,केरला,मिजोरम,नागालैंड, असम, झारखण्ड,तमिल नाडु, उत्तराखंड, बिहार, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर मे बेरोज़गारी 5% तक पहुँच गयी है। यहाँ तक कि गोवा, मणिपुर, नागालैंड और केरल में ये आंकड़े 10% को भी पार कर गए हैं। इससे पहले 2011-12 में सिर्फ तीन राज्यो और केंद्र शासित प्रदेश में बेरोज़गारी ने 10% को पार किया था जिनमे लक्षद्वीप, त्रिपुरा और नागालैंड शामिल थे।

बताये गए आंकड़ों के हिसाब से तो देश की स्थिति बेहद ख़राब होती दिख रही है जब कि सरकार ने ये वादा किया था की वो जनता के रोज़गार की समस्या पर खासा ध्यान देगी लेकिन अब सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई पहल नहीं दिख रही है। देश का युवा बेरोज़गारी की मार झेल रहा है ऐसे में ज़रूरी है कि मोदी सरकार ये समझे की हर व्यक्ति चाय और पकोड़े बेच के घर नहीं चला सकता है इसके लिए सरकार को भी इस समस्या पर ध्यान देना होगा और देश की मदद करनी होगी।

the panchayat

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