पेट्रोल डीजल के भाव कैसे बढ़ते और घटते है

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काश! ऐसा कोई जुगाड़ होता…. जिससे गाड़ी भी चलती रहती और जेब से एक पैसा भी नहीं लगता. काश!!!! ऐसा सपने की जगह वास्तव में होता है तो कितना मजा आता ना. देश में जिस तरीके से हर रोज पेट्रोल और डीजल के दाम बदलते रहते है. उस तरीके से तो गिरगिट भी अपना रंग नहीं बदलता होगा.

चलिये मुद्दे की ओर बढ़ते है. देश में पेट्रोल डीजल के भावो में डेली फेरबदल होता रहता है ये तो सभी को पता होगा लेकिन उनके डेली बदलाव के पीछे क्या कारण होते है वो कुछ एक लोगो को ही पता होंगे. जिनको पता है वो दूसरे को भी बताए और जिनको नहीं पता है वो विडियो लास्ट तक देखेंगे तो वो भी जान जाएंगे और साथ ही दूसरों को भी बता पाएंगे.

देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ पहले जब सात दिन बाद दामों में फेर बदल करती थी तब उन्हे थोड़ा नुकसान पहुँचता था. उसी नुकसान की भरपाई के लिए उन्होने डेली बेसिस पर पेट्रोल डीजल के दाम लगाने शुरू किये.

#पहले समझते है हर दिन दाम ऊपर नीचे क्यो हो रहे है?

इसके पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल का आयात करना यानि मंगाना पड़ रहा है. भारत देश अपनी जरूरत का केवल 17 फीसदी तेल ही बना पाता है बाकी तेल दूसरे देश से मंगाना पड़ता है. पहले सऊदी अरब से तेल आता था लेकिन अब इराक से तेल आता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में लेन-देन डॉलर में होता है और आपको पता ही होगा डॉलर के दाम हर रोज ऊपर नीचे यानि बदलते रहते है इसीलिए अपने देश में पेट्रोल डीजल के भाव बदलते रहते है.

#पेट्रोल डीजल के भावो को प्रभावित करने वाले मुख्य कारण

  1. कच्चे तेल की लागत – इन्टरनेशनल मार्केट में कीमत का चेंज होना भारत देश पर सीधा सीधा असर डालता है.
  2. तेल की ज्यादा डिमांड – अधिकांश घरो में वाहनो की संख्या में बढ़ोतरी हुयी है. इससे तेल की डिमांड ज्यादा हो जाती है और तेल बाहर से ज्यादा मंगाना पड़ता है.
  3. सप्लाई और डिमांड में तालमेल नहीं बैठना – कई बार डिमांड ज्यादा हो जाती है लेकिन सप्लाई कम होती है. इसका असर भी दामो पर पड़ता है.
  4. रूपये से डॉलर की एक्स्चेंज रेट – जैसे पहले ही बताया डॉलर की कीमत में चेंजेज़ आएंगे तो तेल के दामों में भी चेंज आएगा.
  5. लॉजिस्टिक्स – समुद्र के रास्ते से आने वाले तेल पर एक्साइज ड्यूटी लगने के बाद हर राज्य सरकार का अपने अपने राज्य में टैक्स लगता है जिससे हर राज्य में तेल के भाव भी अलग अलग होते है.
crude oil barrel

ये पाँच फ़ैक्टर्स तेल की कीमतों पर असर डालते है. तेल की कीमत प्रति बैरल डॉलर में चुकानी पड़ती है. एक बैरल में 159 लीटर तेल होता है. फिर इसके ऊपर एंट्री टैक्स, लैंडिंग कॉस्ट, ऑयल कंपनी का मार्जिन, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट, एक्साइज़ ड्यूटी, रोड सेस, पेट्रोल पंप डीलर का कमीशन, वैट और राज्य सरकार का टैक्स लगता है. जिससे सरकार द्वारा खरीदा गया तेल ग्राहको को बढ़े हुये दाम में मिलता है.

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