टीआरपी और मीडिया

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मीडिया और जनता के बीच एक गहरा संबंध है. मीडिया जो कुछ भी छापती या दिखाती है वो खबर जनता के लिए सच समान है. मीडिया ने अगर कोई झूठी खबर जनता के बीच फैला दी तो जनता उसे सच मानकर उसका विरोध करना शुरू कर देगी. आज कल मीडिया का कुछ तबका TRP के चक्कर में ऐसी-ऐसी खबरे प्रसारित कर देते है जिससे जनता की मानसिकता पर गहरा असर हो रहा है.

#TRP क्या होती है?

TRP का पूरा नाम टेलीविज़न रेटिंग पॉइंट है. इसका काम केवल ये चेक करना है कि किस चैनल पर कौनसा प्रोग्राम दर्शको को अपनी ओर खींच पा रहा है. उसके अनुसार उस प्रोग्राम को रेटिंग दी जाती है. रेटिंग के अनुसार विज्ञापन वाले अपनी विज्ञापन यानि एड स्पोंसर करते है.

इसी TRP के चलते मीडिया का कुछ तबका अंधा हो चुका है. मैं आपके सामने 2 केस प्रस्तुत करूंगा जिससे आपको TRP वाला मामला समझ में आ जाए.

#पहला केस

अभी हाल ही में आपने बरेली से एक लड़की की भाग कर शादी करने वाली बात सुनी या देखी होगी. हाँ जी, जो आप सोच रहे है उसी की बात कर रहा हूँ. भाजपा विधायक राजेश मिश्रा की बेटी साक्षी मिश्रा जो अपने प्रेमी अजितेश के साथ भागकर शादी कर ली थी. लव मैरिज करना कोई गुनाह नहीं है लेकिन अपने परिवार की इज्जत चौखट के बाहर उछालना बहुत ही गलत है. TRP वाली मीडिया ने इस बात को दलित और ब्राह्मण के रूप में जोड़ कर प्रस्तुत कर दिया. जिससे जनता में आक्रोश का माहौल पैदा हो गया. मामला इतना बढ़ गया कि भाजपा विधायक राजेश मिश्रा को आगे आकर कहना पड़ा मैं एक विधायक हूँ लेकिन मैं अपने ही क्षेत्र में नहीं जा सकता हूँ. क्योंकि बात को इतनी ज्यादा तवज्जो मिल गयी है कि मैं घुट घुट कर मरने जैसी हालात में पहुँच गया हूँ.

जो बात घर पर बैठ कर आपस में बातचीत करके सुलझ सकती थी उस बात को TRP मीडिया ने इतनी गंदी तरीके से फैला दिया की एक बाप घुट-घुट कर जीने में और घर में बैठे रहने मे मजबूर हो गया.

#दूसरा केस

बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में चमकी बुखार की लहर दौड़ी थी. इस बुखार की चपेट में लगभग 108 बच्चो की मृत्यु हो गयी थी. ये बुखार भी छोटे बच्चो को ही अपना शिकार बनाता था. तब देश में जनता को सबसे तेज खबर पहुँचाने वाली न्यूज चैनल इस इलाके के एक हॉस्पिटल के ICU में जाकर ग्राउंड रिपोर्ट करती है. उस ग्राउंड रिपोर्ट में चमकी बुखार के चपेट में आए बच्चो के अभिभावकों के साथ साथ वहाँ इलाज कर रहे डॉक्टरो से बातचीत करती नजर आ रहे थे. गौर देने वाली बात ये है की इलाज कर रहे डॉक्टर को इलाज के बीच मे ही रोक कर उनसे सवाल जवाब किए जा रहे थे. ये उनकी 5-10 मिनिट की बातचीत बच्चो की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने जैसा था. क्या उन्होने एक बार भी नहीं सोचा कि डॉक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट ICU में ना ली जाये? खैर, उसके बाद जनता का रौद्र अवतार देखने को मिला.

ये दोनों केस TRP मीडिया की सच्चाई बताने के लिए उपयोग में लिए गए थे जिससे आप लोग मीडिया और TRP मीडिया में अंतर समझ सको.

पत्रकारिता यानि मीडिया कि जब स्थापना की गयी थी तब इनका मूल उद्देशय जनता को सही और सच्ची ख़बरे देना है जिससे जनता को मालूम हो कि देश मे चल क्या रहा है. लेकिन TRP वाली मीडिया इतना अंधा हो जाता है की कभी-कभी जनता को गुमराह करने वाली ख़बरे प्रसारित कर देते है जो की सही नहीं होती. जनता भी बिना सोचे समझे उन गुमराह वाली खबरों का विरोध करने की जगह उनका समर्थन करती नजर आती है.

द पंचायत टीम का मानना है कि मीडिया जनहित वाली खबरे प्रसारित करे जिनसे उनकी TRP के साथ साथ उनके चैनल का नाम भी एक अलग मुकाम पर पहुँच जाए. बेफिजूल की खबरों से परहेज रखे जिससे जनता और मीडिया का संबंध और गहरा हो जाएगा.

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